R Praggnanandhaa defeats Magnus Carlson: भारतीय युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रगनानंद ने लास वेगास में आयोजित फ्रीस्टाइल चेस ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में बुधवार को इतिहास रच दिया। महज 19 साल की उम्र में प्रगनानंद ने दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी और टूर्नामेंट के सह-संस्थापक मैग्नस कार्लसन को चौंकाते हुए जबरदस्त जीत दर्ज की। यह मुकाबला टूर्नामेंट के चौथे राउंड में खेला गया था, जिसमें भारतीय शतरंज खिलाड़ी ने केवल 39 चालों में यह मुकाबला अपने नाम कर लिया।
शुरू से अंत तक दिखाया दबदबा
सफेद मोहरों से खेलते हुए प्रगनानंद ने शुरुआत से ही पूरे मैच में बढ़त बनाए रखी। उन्होंने ना सिर्फ आक्रामक खेल दिखाया बल्कि अपनी सटीकता के दम पर कार्लसन को पीछे छोड़ दिया। मुकाबले के दौरान प्रगनानंद की एक्युरेसी 93.9 प्रतिशत दर्ज की गई, जो कार्लसन की 84.9 प्रतिशत की सटीकता से कहीं ज्यादा बेहतर थी। 10 मिनट और 10 सेकंड के टाइम कंट्रोल फॉर्मेट में खेला गया यह मैच दर्शकों के लिए बेहद रोमांचक रहा, जिसमें प्रगनानंद की रणनीति ने अंत तक बाजी मार ली।
तीनों प्रारूपों में कार्लसन को दी मात
इस जीत के साथ प्रगनानंद ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली। अब वह विश्व चैंपियन कार्लसन को शतरंज के तीनों प्रमुख प्रारूपों क्लासिकल, रैपिड और ब्लिट्ज में हराने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं। इस जीत ने न केवल उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत किया, बल्कि उनके खेल कौशल की गहराई को भी साबित किया।
फ्रीस्टाइल शतरंज बनी नई पसंद
मैच के बाद प्रगनानंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “अब मुझे क्लासिकल से ज़्यादा फ्रीस्टाइल फॉर्मेट पसंद आने लगा है।” उनका यह बयान इसलिए भी खास रहा क्योंकि जिस टूर्नामेंट में उन्होंने यह जीत दर्ज की, उसे कार्लसन ने खुद शुरू किया था और यह चेस960 या फ्रीस्टाइल चेस के कॉन्सेप्ट पर आधारित है। ऐसे में आयोजक और अवधारणा निर्माता को उन्हीं के मैदान पर मात देना प्रगनानंद की जीत को और भी प्रतीकात्मक और प्रभावशाली बनाता है।
कार्लसन का टूर्नामेंट में सफर हुआ खत्म
टूर्नामेंट की शुरुआत में कार्लसन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विन्सेंट कीमर और लेवोन आरोनियन जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को हराया था। लेकिन इसके बाद उनका खेल लड़खड़ा गया। तीसरे राउंड में सिंडारोव के खिलाफ मैच ड्रॉ रहा, जबकि चौथे राउंड में उन्हें प्रगनानंद से हार का सामना करना पड़ा। पांचवें राउंड में वेस्ली सो के खिलाफ भी वह पराजित हुए और छठे राउंड में नोडिरबेक अब्दूसत्तारोव से उनका मैच ड्रॉ रहा।
हालांकि आखिरी राउंड में उन्होंने बिबीसारा असाउबायेवा के खिलाफ जीत दर्ज की, लेकिन तब तक ग्रुप स्टेज के नॉकआउट के लिए उनके मौके खत्म हो चुके थे। प्लेऑफ में भी उन्हें लगातार दो मुकाबलों में हार मिली, और वे पांचवें स्थान पर रहते हुए टूर्नामेंट से बाहर हो गए।
भारतीय खिलाड़ियों का मिला-जुला प्रदर्शन
जहां एक ओर प्रगनानंद ने सफेद मोहरों के ग्रुप में शानदार प्रदर्शन करते हुए 4.5 अंकों के साथ टॉप पोजिशन हासिल की, वहीं अन्य भारतीय शतरंज खिलाड़ियों का प्रदर्शन मिश्रित रहा। टाईब्रेक से पहले प्रगनानंद ने सिंडारोव और अब्दूसत्तारोव के खिलाफ ड्रॉ खेला, और बाकी मैचों में बेहतरीन जीत के साथ वे चैंपियनशिप श्रेणी में पहुंचे।
ब्लैक ग्रुप से भारत के अर्जुन एरिगैसी ने भी दमदार प्रदर्शन किया। उन्होंने हिकारू नाकामुरा और हैंस नीमन जैसे खिलाड़ियों के पीछे रहते हुए तीसरा स्थान हासिल किया और अगले दौर में प्रवेश किया। हालांकि, विदित गुजराती इस बार अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके और टूर्नामेंट से बाहर हो गए।