Chandan Mishra shot dead : राजधानी पटना के प्रतिष्ठित पारस अस्पताल में गुरुवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां बक्सर के कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। बक्सर के औद्योगिक थाना क्षेत्र के सोनबरसा गांव निवासी मंटू मिश्रा का पुत्र चंदन मिश्रा एक हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहा था और पैरोल पर जेल से बाहर आकर अपना इलाज करवा रहा था। इस वारदात ने एक बार फिर बिहार में अपराध के बढ़ते ग्राफ पर चिंता जाहिर की है।
चंदन मिश्रा: एक अपराधी का इतिहास और राजेंद्र केसरी हत्याकांड
चंदन मिश्रा के खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें 14 साल पहले बक्सर जिला मुख्यालय के अमला टोली में मुख्य सड़क पर हुआ राजेंद्र केसरी हत्याकांड सबसे अधिक चर्चित था। यह घटना 21 अगस्त 2011 को घटी थी, जब भोजपुर चूना भंडार के मालिक राजेंद्र केसरी अपनी दुकान का शटर खोल रहे थे। उसी वक्त बक्सर जिले के अपराधियों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, जिससे उनकी मौत हो गई थी।
राजेंद्र के परिजनों ने इस मामले में बक्सर निवासी चंदन मिश्रा, ओंकारनाथ सिंह उर्फ शेरू सिंह, सुरेंद्र मिश्रा उर्फ छोटू मिश्रा, और निलंबित पुलिसकर्मी दीनबंधु सिंह सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। यह वारदात चंदन और शेरू के आपराधिक जीवन की पहली बड़ी घटना मानी जाती है। शेरू भी बक्सर औद्योगिक थाना क्षेत्र के दुल्लहपुर गांव का निवासी है, और उनके गांव एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। इन दोनों ने रंगदारी वसूलने के उद्देश्य से बक्सर के एक प्रसिद्ध व्यवसायी की हत्या की थी। उनका मकसद इस घटना को खूब प्रचारित करना और व्यापारियों में अपना खौफ पैदा करना था, जिसमें वे कुछ हद तक सफल भी रहे।
राजेंद्र केसरी हत्याकांड
हालांकि, उस समय पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कुछ ही दिनों में चंदन और शेरू को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने इस मामले में त्वरित जांच की और स्पीडी ट्रायल के माध्यम से सुनवाई की गई। 3 अक्टूबर 2013 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरेंद्र तिवारी ने चंदन मिश्रा, दीनबंधु सिंह और छोटू मिश्रा को उम्रकैद की सजा सुनाई।
इससे पहले 29 सितंबर 2012 को, चंदन को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 386 (रंगदारी), 467, 468, 471 (जालसाजी) और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषी ठहराया गया था। दीनबंधु सिंह और छोटू मिश्रा को धारा 302/120बी सहित अन्य धाराओं में दोषी करार दिया गया। शुरुआत में सजा की तारीख 8 अक्टूबर 2012 तय की गई थी, लेकिन आरोपियों के वकील ने हाईकोर्ट में अपील की, जिसके कारण सजा पर रोक लग गई। बाद में, उच्च न्यायालय से पुनः अनुमति मिलने पर दोबारा सुनवाई करते हुए अपराधियों को सजा सुनाई गई।
इस मामले में 13 गैर-सरकारी गवाहों, तीन चिकित्सा अधिकारियों, दो न्यायिक दंडाधिकारियों और दो पुलिस अधिकारियों ने अभियोजन के पक्ष में बयान दिए थे। अभियोजन पक्ष ने इस हत्या को ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ की श्रेणी में रखते हुए फांसी की सजा की मांग की थी, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने चंदन, दीनबंधु और छोटू को उम्रकैद की सजा सुनाई। एक अन्य आरोपी का मामला किशोर न्याय परिषद में अलग से चला था।
शेरू सिंह की फरारी और कानूनी दांव-पेच
राजेंद्र केसरी हत्याकांड के ट्रायल के दौरान, इस मामले का सबसे प्रमुख आरोपी शेरू सिंह बक्सर कोर्ट में पेशी के दौरान एक हवलदार को गोली मारकर फरार हो गया था, लेकिन बाद में उसे आरा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसकी सुनवाई अलग से हुई। तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रदीप मल्लिक ने शेरू को राजेंद्र केसरी हत्याकांड का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। शेरू ने इस सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की, और 12 फरवरी 2020 को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की बेंच ने सजा पर रोक लगाते हुए मामले की दोबारा सुनवाई का आदेश दिया।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई, और हाल ही में जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने शेरू को दोषी ठहराते हुए तीन अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई: हत्या के लिए उम्रकैद, रंगदारी के लिए 7 साल और आर्म्स एक्ट में 10 साल की सजा। ये सभी सजाएं एक साथ चलनी थीं। शेरू फिलहाल अपनी सजा काट रहा है।
चंदन मिश्रा की हत्या के बाद बिहार में आपराधिक गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए पुलिस और प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इस घटना से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।