मप्र के 23 जिलों के 63 थाने संवेदनशील घोषित, पुलिस को अलर्ट रहने के निर्देश

भोपाल: मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के 23 जिलों के 63 थाना क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित किया है। गृह विभाग ने अधिसूचना जारी कर इन इलाकों को ‘आइडेंटिफाई एरिया’ की श्रेणी में रखा है। इन थानों में विशेष सतर्कता बरतने और गंभीर अपराधों पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। खास बात यह है कि जिन क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित किया गया है, वहां अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की आबादी अपेक्षाकृत अधिक है।

संवेदनशील घोषित करने की वजह

पिछले कुछ सालों में इन थाना क्षेत्रों में कई गंभीर आपराधिक घटनाएं हुईं, जिनसे सरकार की छवि धूमिल हुई और राजनीतिक विवाद भी खड़े हुए। इन घटनाओं में विशेष रूप से एससी-एसटी वर्ग से जुड़े अपराधों की संख्या अधिक रही। इसी कारण गृह विभाग ने इन्हें ‘आइडेंटिफाई एरिया’ घोषित कर पुलिस को नई रणनीति अपनाने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस की रणनीति

गृह विभाग के आदेश में कहा गया है कि—

इन थानों के पुराने विवाद जल्द सुलझाए जाएं,  यदि कोई घटना घटती है तो तुरंत कार्रवाई की जाए, जरूरत पड़ने पर नए पुलिस चौकियां बनाई जाएंगी। थाना क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के अभियान चलाए जाएंगे। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गश्त और निगरानी बढ़ाई जाएगी।

यह कदम केंद्र सरकार के अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत उठाया गया है। किसी थाना क्षेत्र को ‘आइडेंटिफाई एरिया’ घोषित करने का मतलब है कि वहां पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इन इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और एससी-एसटी वर्ग पर होने वाले अत्याचार को रोकने के लिए पुलिस को विशेष रूप से संवेदनशील रहना होगा।

अपराध के आंकड़े

स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) के अनुसार, मध्यप्रदेश में पिछले तीन वर्षों में एट्रोसिटी एक्ट के तहत औसतन 10 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हुए।

  • 2021 में कुल 10,081 मामले दर्ज हुए।
  • 2022 में यह संख्या बढ़कर 11,384 हो गई।
  • 2023 में मामूली गिरावट दर्ज की गई और 313 मामले कम होकर आंकड़ा 11,071 पर आ गया।

गृह विभाग का मानना है कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और नई रणनीति से आने वाले समय में ऐसे मामलों पर बेहतर नियंत्रण पाया जा सकेगा।