छिंदवाड़ा: छिंदवाड़ा जिले के चौरई क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। 11 सितंबर की देर रात, मंडरिया गांव की गर्भवती महिला सोना कहार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के शौचालय में बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान नवजात मां के गर्भ से फिसलकर फर्श पर गिर गया और सिर में गंभीर चोट लगने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
नर्स ने की जांच कहा-”अभी डिलीवरी में समय”
परिवार का आरोप है कि समय रहते इलाज नहीं मिलने के कारण यह हादसा हुआ। सोना को रात 2 बजे 108 एम्बुलेंस से अस्पताल लाया गया था। लेकिन वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। ड्यूटी पर तैनात नर्स ने जांच करने के बाद यह कहकर आराम करने चली गई कि अभी डिलीवरी में समय है। इस बीच प्रसव पीड़ा तेज हुई और सोना की सास उसे शौचालय लेकर गई, जहां प्रसव हुआ और नवजात फिसलकर गिर गया।
परिजनों का दावा है कि बच्चा कुछ देर तक रोया भी, लेकिन अस्पताल स्टाफ ने उसे मृत घोषित कर दिया। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने परिवार से जबरन कागजात पर हस्ताक्षर करवाए और डिस्चार्ज फीस भी वसूली। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। आक्रोशित परिवार ने अस्पताल में विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
एसडीएम स्तर की जांच
घटना के बाद एसडीएम प्रभात मिश्रा के निर्देश पर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ने पीड़िता के घर जाकर बयान दर्ज किए। सोना की हालत बिगड़ने पर उसे दोबारा भर्ती कराया गया।
अस्पताल प्रबंधन ने हालांकि दावा किया कि बच्चा मृत ही पैदा हुआ था। ड्यूटी डॉक्टर की रिपोर्ट में कहा गया कि “गर्भावस्था के किसी भी चरण में भ्रूण की मृत्यु संभव है।” हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बिना विस्तृत चिकित्सकीय जांच के यह तय नहीं किया जा सकता कि शिशु की मौत गर्भ में हुई या जन्म के बाद।
जिला कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने कहा, “प्राथमिक जांच के बाद स्टाफ नर्स वीना ठाकुर को लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया गया है। एसडीएम स्तर की जांच चल रही है। अगर किसी डॉक्टर की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
यह घटना न सिर्फ स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविकता को उजागर करती है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसूताओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है।