प्रदेश टुडे संवाददाता, भोपाल: राजधानी में बारिश में बदहाल हुई सड़कों की मरम्मत को लेकर नगर निगम ने कोई विशेष प्लानिंग नहीं की है और वह अपने पुराने परम्मपरागत ढर्रे से ही कुछ जगहों पर जीरा गिट्टी और कोल्ड डामर से इनको भरने की औपचारिकता कर रहा है जबकि दूसरी तरफ लोक निर्माण विभाग अपनी सड़कों को भरने के लिये स्पेशल टैक्निक का इस्तेमाल करने की जुगत कर रहा है। स्थिति यह है कि पीडब्ल्यूडी सड़कों के सुधार के लिए जहां व्हाइट टॉपिंग टेक्निक का उपयोग करने की तैयारी में है। छह करोड़ से मरम्मत की है तैयारी राजधानी में पीडब्ल्यूडी ने अपनी सभी सड़कों की स्टडी की है और 30 सड़कें ऐसी हैं, जहां पर जलभराव होता है। इन पर 6 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। कुल 92.05 किमी में से 7.70 किमी हिस्से पर जलभराव होता है। इसी हिस्से में सीमेंट कंक्रीट का प्लान है। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर संजय मस्के ने बताया, जलभराव वाली सड़क पर सीमेंट कंक्रीट कराया जाएगा। इसके अलावा गारंटीवाली सड़कों पर काम नहीं करने वाले ठेकेदारों को नोटिस भी देने की तैयारी है।
जर्जर सड़कों की नहीं हुई लिस्टिंग
नगर निगम की सड़कों के हाल बुरे हैं। खासकर कॉलोनियों की सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे हो गए हैं। इस वजह से वहां की आबादी हर रोज परेशान हो रही है। पुराने शहर के ऐशबाग, अशोका गार्डन, पुल बोगदा, बरखेड़ी, शिवनगर, करोंद समेत रायसेन रोड, रत्नागिरी, सोनागिरी, आनंद नगर, पटेल नगर, दानिशकुंज, बावड़ियाकलां, बाग सेवनिया, बाग मुगालिया समेत कई जगहों पर सड़कें जर्जर है। निगम ने अभी तक अपनी खराब सड़कों की लिस्टिंग ही नहीं की है और केवल सहायक यंत्रियों के भरोसे काम चल रहा है।
387 किमी सड़कों के काम का सेट करेगा नया पैटर्न, बनेगी लॉग बुक
राजधानी भोपाल में आबादी और क्षेत्र विस्तार के साथ सड़कों की लंबाई और चौड़ाई भी बढ़ रही है इसलिये अब पीडब्ल्यूडी राजधानी की 387 किमी सड़कों पर हुए काम का नया पैटर्न सेट करेगा। इसके चलते कहां किस सड़क पर कितना काम हुआ और कब कब हुआ उसका भी रिकार्ड रखा जाएगा। राजधानी भोपाल में आबादी और क्षेत्र विस्तार के साथ सड़कों की लंबाई और चौड़ाई भी बढ़ रही है। सड़क नई बनाना हो या फिर नवीनीकरण, उन्नयन या फिर चौड़ीकरण करना हो शासन शहर पर औसतन 50 करोड़ रुपए खर्चें करता है। ये राशि सिर्फ पीडब्ल्यूडी की है। इसमें यदि बीडीए, हाउसिंग बोर्ड, नगरीय निकाय को भी शामिल करें तो बजट करीब 100 करोड़ के पास होगा। सालाना 300 किमी से अधिक लंबाई की सड़कों पर काम होता है। 50 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च की जाती है, बावजूद इसके आमजन टूटी सड़कों से गुजरने को मजबूर हैं। शहर के लोगों का कहना है कि सड़के खराब हैं तो करोड़ों रुपए का खर्च कहां किया जा रहा, इसकी जांच की जरूरत है। नर्मदापुरम रोड की सर्विस लेन से लेकर करोद रोड, भानपुर सर्विस लेन, 11 मिल तिराहे की सड़कें सबसे अधिक खराब हैं।