ग्वालियर, मध्य प्रदेश। खराब सड़कों के लिए बदनाम मध्य प्रदेश का ग्वालियर शहर एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार सड़कों के गड्ढों या सुरंगों के कारण नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन के चलते। शहर के लोगों ने अपनी जर्जर सड़क के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को खून से पत्र लिखकर आंदोलन छेड़ दिया है।
15 साल से जर्जर सड़क, हादसे जारी
ग्वालियर दक्षिण विधानसभा के वार्ड-52 स्थित गुढ़ा डांग वाले बाबा रोड की बदहाली पिछले 15 सालों से बनी हुई है। स्थानीय नागरिक लंबे समय से सड़क बनवाने की गुहार लगा रहे हैं। यह मार्ग इतना जर्जर हो चुका है कि गर्मी में भयानक धूल उड़ती है और बारिश में यह खतरे से खाली नहीं रहता, जिसके कारण आए दिन आम नागरिक सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं
करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी यह सड़क 20 से 25 हजार लोगों की बसाहट से जुड़ी है और हजारों लोग प्रतिदिन इसका उपयोग करते हैं। सड़क की हालत किसी कच्ची ग्रामीण सड़क जैसी हो गई है, जहाँ डामर का नामोनिशान नहीं है।
मुख्यमंत्री को स्पीड पोस्ट से भेजा गया ‘खून का पत्र’
सड़क की स्थिति से परेशान होकर, स्थानीय निवासी अब आर-पार के मूड में आ गए हैं। इस आंदोलन की शुरुआत करते हुए, सोमवार को चेतन मोरे नामक एक नागरिक ने अपने खून से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा।
पत्र में गुहार लगाई गई है: “महोदय गुढ़ा वार्ड-52 की डांग वाले बाबा रोड 15 वर्ष से खराब है। आमजन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। निवेदन है कि ग्वालियर दक्षिण विधानसभा की इस सड़क का जल्द निर्माण करने की कृपा करें।” यह खून से सना पत्र स्पीड पोस्ट के माध्यम से सीएम को भेजा गया है।
पार्षद से विधायक तक लगा चुके हैं गुहार
स्थानीय नागरिक चेतन मोरे ने बताया कि पिछले 15 सालों में इस सड़क के लिए वार्ड के पार्षद, नगर निगम के अधिकारियों, नेताओं और विधायक तक से कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन सड़क का निर्माण आज तक नहीं हो पाया। अब थक-हारकर, लोगों ने मुख्यमंत्री को खून से पत्र लिखने का कठोर कदम उठाया है।
चुनाव बहिष्कार की भी तैयारी
सड़क निर्माण न होने से गुस्साए स्थानीय लोगों ने आगामी चुनावों के बहिष्कार की भी चेतावनी दी है। उनका मन है कि अगर मुख्यमंत्री जल्द इस सड़क का निर्माण नहीं करवाते हैं, तो इस क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति नगर निगम, विधानसभा या लोकसभा चुनावों में वोट नहीं डालेगा। फिलहाल, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री सड़क मार्ग बनवा देते हैं तो यह आंदोलन समाप्त हो जाएगा।