भोपाल: राजधानी में पुलिस प्रशासन ने लोगों को शस्त्र लायसेंस तो दे दिए, लेकिन उसकी निगरानी करने में चूक हो रही है। यही वजह है कि शस्त्र लायसेंस की फायरिंग से अब लोगों की जान तक जाने लगी। कोलार के एक मामले में तो दस साल की मासूम रिया रजक को अपनी जान तक गंवाना पड़ी। जिसमें एक रिटायर्ड डीएसपी के बेटे ने अपने पिता की लायसेंसी 315 बोर बंदूक से हर्ष फायर किया था। इसके बावजूद भी पुलिस प्रशासन ने शस्त्र लायसेंस की निगरानी को लेकर कोई गाइडलाइन नहीं है। जिसके चलते अब खुलेआम हर्ष फायर के नाम पर गोलियां चलाई जा रही हैं। अभी कुछ दिनों से इस तरह की वारदातों में लगातार बढ़ौतरी हुई है, जिसमें हुए अपराध में लायसेंसी हथियार का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि पुलिस ने मामलों को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई भी की है। शस्त्र लायसेंस धारी को गोली का एक सीमित कोटा दिया जाता है। उस कोटे के तहत आने वाली बुलेट का इस्तेमाल कहां किया। इसका कोई रिकार्ड पुलिस प्रशासन के पास मौजूद नहीं है। प्रदेश में हर्ष फायर करना अपराध है, लेकिन त्यौहारों और शादी के मौकों पर जमकर गोलियां चलाई जाती हैं। इतना ही नहीं उसका प्रचार प्रसार भी सोशल मीडिया पर किया जाता है। हालांकि कई मामलों में सोशल मीडिया की रील्स के आधार पर भी पुलिस कार्रवाई कर देती है। मध्यप्रदेश में गृह विभाग स्वंय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने पास रखा हुआ है। बताया जाता है कि करीब डेढ़ साल से किसी भी व्यक्ति को शस्त्र लायसेंस नहीं दिया गया है।