कांग्रेस महासचिव रूपल संचेती ने की सुहाग मैरिज हाल में प्रेस वाता
नर्मदापुरम्: मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की महासचिव एवं नर्मदापुरम जिले की संगठन सृजन प्रभारी रूपल संचेती ने सुहाग मैरिज हाल में एक प्रेस प्रेसवार्ता की। प्रेसवार्ता में नगर महिला कांग्रेस अध्यक्ष नेहा चावरे, पूर्व पार्षद साधना दुबे, पार्षद सीमा भदोरिया, बंधन ओझा, कांग्रेस सेवादल यंग बिग्रेड के प्रदेश अध्यक्ष गजानन तिवारी, जिला कांग्रेस प्रवक्ता अनिल रैकवार विशेष रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए रूपल संचेती ने कहा कि सबसे पहले मैं नर्मदा की पावन धरती को नमन करती हूं। मैं हृदय से धन्यवाद देती हूं। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा, मध्यप्रदेश प्रभारी सुनीता गावंड, प्रदेश अध्यक्ष विभा पटेल और कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नूरी खान का, जिन्होंने मुझ पर विश्वास जताते हुए मुझे महिला कांग्रेस नर्मदापुरम जिले का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। जैसा कि आप सभी जानते हैं, हाल ही में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा संगठन सृजन अभियान चलाया गया। जिसमें सभी जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं से संवाद किया गया और संगठन को नई दिशा व ऊर्जा दी गई। अब इसी कड़ी में महिला कांग्रेस द्वारा भी प्रदेशव्यापी संगठन सृजन अभियान प्रारंभ किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य महिला कांग्रेस को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाना, संगठन में नई ऊर्जा और नेतृत्व तैयार करना और हर महिला कार्यकर्ता को अपने विचार और क्षमता के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना। महिला कांग्रेस का यह अभियान केवल संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं। बल्कि महिलाओं की भागीदारी को राजनीति के केंद्र में लाने का एक सामाजिक संकल्प है। आप सभी जानते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने ही सबसे पहले यह मांग उठाई थी कि देश की महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा चुनावों में आरक्षण मिले। यह कांग्रेस का पुराना, नैतिक और ऐतिहासिक संकल्प रहा है कि महिलाएं केवल राजनीति की दर्शक नहीं, बल्कि नीति-निर्माण की भागीदार बनें। आज जब महिलाओं को लोकसभा में आरक्षण का अधिकार मिला है। तो यह कांग्रेस की उस लंबे संघर्षशील दृष्टि का परिणाम है। जो हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण और समान अवसर के पक्ष में रही है। कांग्रेस पार्टी महिलाओं की राजनीति में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। हमारा विश्वास है कि जब महिलाएं राजनीति में सशक्त होंगी। तो शासन में संवेदनशीलता, ईमानदारी और करुणा भी सशक्त होगी।