जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले स्थित रेंगी गांव में भूस्खलन के कारण बेघर हुए लगभग 18 परिवार पिछले दो से तीन महीनों से तंबू (टेंट) में अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं। इन परिवारों ने आगामी भीषण ठंड से पहले सरकार से स्थायी पुनर्वास और वित्तीय सहायता की तत्काल मांग की है।
पीड़ितों का दर्द: “हमें कोई मदद नहीं मिली”
ग्रामीणों ने बताया कि भूस्खलन ने उनके घरों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है, जिसके चलते लगभग 16 से 17 परिवार अस्थाई तंबू में रहने को मजबूर हैं।
एक प्रभावित ग्रामीण, शालू देवी ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा, “हम पिछले 2-3 महीनों से इन तंबुओं में रह रहे हैं। हमारे घर भूस्खलन के कारण तबाह हो गए। हम सरकार से मांग करते हैं कि हमें रहने के लिए घर दिया जाए या आर्थिक सहायता दी जाए।” उन्होंने स्पष्ट किया, “हमें सरकार की तरफ से अभी तक किसी भी प्रकार की कोई मदद नहीं मिली है।”
आगामी चुनौती: कड़कड़ाती सर्दी
पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण, उधमपुर में सर्दी जल्द शुरू हो जाती है और अत्यधिक कठोर होती है। ऐसे में, खुले मैदान में तंबू में रह रहे बच्चों, बुज़ुर्गों और परिवारों के लिए आगामी सर्दियां एक बड़ा खतरा बन सकती हैं। इन परिवारों का कहना है कि उनके पास न तो नए घर बनाने के लिए ज़मीन है और न ही संसाधन, जिसके कारण वे प्रशासन से सुरक्षित स्थानों पर ज़मीन और निर्माण सहायता देने की गुहार लगा रहे हैं।
यह मामला प्रशासन के सामने बेघर हुए परिवारों के लिए आपदा प्रबंधन और तत्काल पुनर्वास की बड़ी चुनौती पेश करता है।