छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है, जहाँ ठग अब लोगों को फँसाने के लिए नई-नई तरकीबें अपना रहे हैं। हाल ही में, साइबर ठगों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) फॉर्म भरने के बहाने मतदाताओं से ओटीपी (OTP) मांगने का एक नया पैटर्न शुरू किया है। इस नए पैटर्न की जानकारी मिलते ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने तत्काल एडवाइजरी जारी कर मतदाताओं को सतर्क रहने की अपील की है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन आयोग का कोई भी कर्मचारी फोन के माध्यम से किसी भी मतदाता से कभी भी ओटीपी नहीं पूछता। यदि ऐसा होता है, तो मतदाता तुरंत पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
SIR पैटर्न और ठगी का तरीका
साइबर ठग, निर्वाचन कर्मी बनकर लोगों को फोन करते हैं और उन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) फॉर्म भरने की बात कहकर झाँसे में लेते हैं। बातचीत के दौरान, वे ओटीपी मांगते हैं और ओटीपी नहीं देने पर वोटर लिस्ट से नाम कटने की धमकी देते हैं। नाम कटने के डर से लोग उन्हें ओटीपी बता देते हैं, और उनके अकाउंट से पैसे कट जाते हैं। यह पैटर्न कई राज्यों में सामने आया है, जहाँ निर्वाचन आयोग एसआईआर फॉर्म भरने की प्रक्रिया करवा रहा है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में साइबर ठगों ने जनवरी 2025 से जून 2025 तक 67,389 लोगों से ₹791 करोड़ की ऑनलाइन ठगी की थी।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अपील और बचाव के उपाय
राज्य निर्वाचन आयुक्त यशवंत कुमार ने एसआईआर पैटर्न पर ठगी से बचने के लिए सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति एसआईआर के नाम पर कॉल करता है और ओटीपी मांगता है, तो उसे तुरंत मना कर दें। यदि वह कॉल करके दबाव बनाता है या धमकी देता है, तो उसे साफ-साफ कहें कि आप कार्यालय जाकर या अपने बीएलओ (BLO) से संपर्क करेंगे।
निर्वाचन आयोग ने अपील की है कि ओटीपी मांगने वालों का कॉल आने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1950 पर कॉल करें या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म @CEOChhattisgarh (फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम) पर टैग करके इसकी सूचना दें।
डेटा चोरी के संकेत और राष्ट्रीय परिदृश्य
साइबर एक्सपर्ट मोहित साहू के अनुसार, यदि आपके मोबाइल का डेटा चोरी किया जा रहा है, तो डेटा यूसेज अचानक बढ़ सकता है। इसके अलावा, अगर फोन की बैटरी जल्दी खत्म हो रही हो, फोन अक्सर गर्म हो रहा हो, या ऐप्स असामान्य तरीके से काम कर रहे हों, तो यह भी डेटा चोरी की चेतावनी हो सकती है।
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह वर्षों में भारत में साइबर ठगी की घटनाएं 42 गुना बढ़ गई हैं, जो अब केवल तकनीकी नहीं, बल्कि एक बड़ी आर्थिक और कानूनी चुनौती बन गई है। 2023 में 9.2 लाख से अधिक साइबर अपराध संबंधी शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें लगभग ₹6,000 करोड़ का नुकसान हुआ। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (ICCC) ने अनुमान लगाया है कि 2025 में भारतीयों को साइबर ठगी से 1.2 लाख करोड़ से अधिक का नुकसान होने की आशंका है। विशेषज्ञों ने आम जनता को डिजिटल लेनदेन करते समय केवल भरोसेमंद और लाइसेंस प्राप्त प्लेटफॉर्म पर ही ऑनलाइन पेमेंट और बैंकिंग करने की सलाह दी है।