अपर सत्र न्यायाधीश जितेंद्र सिंह कुशवाह की अदालत ने एक सनसनीखेज हत्याकांड में फैसला सुनाया है। इसमें एक महिला ने अपने पहले पति की हत्या अपने दूसरे पति से करवा दी थी। कोर्ट ने दूसरे पति को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई साथ ही चार हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं महिला और उसके भाई को हत्या की साजिश में संलिप्तता साबित न होने के कारण दोनों को बरी कर दिया गया।
मामले की पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी सुरेंद्र सिंह वास्केल ने की, जबकि जिला लोक अभियोजन अधिकारी राजेंद्र सिंह भदौरिया ने घटना का विवरण देते हुए बताया कि आरोपी आर्यन सिंह सरदार उर्फ रितेश दीवान (परदेशीपुरा निवासी) ने अपनी पत्नी नेहा और एक अन्य व्यक्ति की मदद से 14 दिसंबर 2019 को प्रमोद सिंह राजपूत (साकेत धाम निवासी) की निर्मम हत्या कर दी थी। अगले दिन शव रेलवे माल गोदाम, पोलो ग्राउंड के पास मिला था।
बाणगंगा पुलिस को मृतक के बेटे गोलू ने बताया कि उसके पिता को पिंटू उर्फ नवीन कुशवाह बुलाकर ले गया था। गोलू के अनुसार, पिंटू की बहन नेहा के उसके पिता प्रमोद सिंह से अवैध संबंध थे, लेकिन बाद में नेहा ने प्रमोद को छोड़कर आर्यन सिंह सरदार के साथ रहना शुरू कर दिया था। दोनों के बीच एक बच्चा भी था जिसे नेहा अपने साथ ले गई थी।
बाद में प्रमोद को पता चला कि नेहा और आर्यन ने उनके बच्चे को बेच दिया है। इस बात से डरकर कि प्रमोद इस मामले को उजागर कर उन्हें फंसा सकता है, दोनों ने उसकी हत्या की साजिश रची। नेहा ने अपने भाई पिंटू के जरिए प्रमोद को बाहर बुलवाया और आर्यन ने उसकी हत्या कर शव को सुनसान जगह पर फेंक दिया।
पुलिस ने शुरू में नेहा, उसके भाई नवीन कुशवाह और आर्यन सिंह के खिलाफ हत्या व साजिश का मुकदमा दर्ज किया था। लंबी जांच और विचारण के बाद कोर्ट ने केवल आर्यन सिंह को दोषी ठहराया, जबकि नेहा और उसके भाई को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया।