गुरुवार को भारतीय समयानुसार देर रात करीब 12:30 बजे अमेरिका के दक्षिणी कैलिफोर्निया स्थित ट्रोना शहर के एक रेगिस्तानी इलाके में US एयरफोर्स का एक F-16 लड़ाकू विमान क्रैश हो गया। हालांकि, विमान हादसे से कुछ सेकंड पहले पायलट सुरक्षित बाहर निकलने (इजेक्ट) में कामयाब रहा, जिससे उसकी जान बच गई।
दुर्घटनाग्रस्त विमान ट्रोना एयरपोर्ट से लगभग तीन किलोमीटर दूर गिरा। एयरपोर्ट मैनेजर के मुताबिक, इस क्षेत्र में अक्सर सैन्य विमान उड़ान भरते रहते हैं।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो फुटेज में देखा गया कि विमान तेजी से नीचे गिर रहा था जबकि पायलट पैराशूट के सहारे बाहर निकल आया। विमान के जमीन से टकराते ही एक बड़ा धमाका हुआ और आसमान में काला धुआं छा गया।
जांच जारी
अधिकारियों ने बताया कि सुबह 6 थंडरबर्ड्स जेट प्रशिक्षण के लिए उड़ान भरे थे, लेकिन उनमें से केवल पांच ही बेस पर लौटे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, विमान चाइना लेक नेवल एयर वेपन्स स्टेशन के पास गिरा, जो सैन्य प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक रीजन है।
क्रैश के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। एयरफोर्स की 57th विंग पब्लिक अफेयर्स ऑफिस के अनुसार, क्रैश साइट की जांच पूरी होने के बाद ही और जानकारी साझा की जाएगी। F-16 फाइटिंग फाल्कन थंडरबर्ड्स के एयर शो और ट्रेनिंग मिशन का अहम हिस्सा है।
F-16 एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जिसे मूल रूप से जनरल डायनामिक्स ने 1970 के दशक में बनाया था और अब इसका निर्माण लॉकहीड मार्टिन करती है। यह चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है जो हवा से हवा में मार करने में सक्षम है। इसकी अधिकतम स्पीड 2414 किलोमीटर प्रति घंटा है और रेंज 4220 किलोमीटर तक है। पाकिस्तान सहित 25 से अधिक देश F-16 का इस्तेमाल करते हैं। 1976 से अब तक 4,600 से अधिक जेट बनाए जा चुके हैं।
इस वर्ष 8वीं दुर्घटना
इस साल यह आठवीं बार है जब कोई F-16 जेट क्रैश हुआ है। सर्वाधिक 3 बार यूक्रेन में, 2 बार अमेरिका में, और शेष पोलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया में F-16 दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं।
भारत ने ठुकराया अमेरिकी ऑफर
अमेरिका 2000 के दशक से भारत को F-16 जेट बेचने की पेशकश कर रहा है, लेकिन भारत ने इन्हें खरीदने से इनकार कर दिया है। इसका मुख्य कारण पाकिस्तान के पास 1980 के दशक से ही इन लड़ाकू विमानों की मौजूदगी है।