मध्य प्रदेश की स्वच्छता नगरी इंदौर इन दिनों भीषण जल संकट की चपेट में है। तेज गर्मी और भूजल स्तर के भारी गिरावट के कारण नगर निगम के हजारों बोरिंग सूख गए हैं, जिससे कई इलाकों में घरों में नल सूख गए हैं। रहवासी अब टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं और पानी की बूंद-बूंद के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। इस स्थिति में सड़कों पर झगड़े, चक्का जाम और प्रदर्शन आम हो गए हैं।
संकट की गंभीरता
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, शहर में कुल 6500 सरकारी बोरिंग हैं, जिनमें से 3538 बोरिंग पूरी तरह सूख चुके हैं। बढ़ती गर्मी (42 डिग्री के आसपास तापमान) ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। यशवंत सागर, बिलावली और पिपलियापाला जैसे प्रमुख जल स्रोतों का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है।
कई कॉलोनियों में नल से पानी सप्लाई बंद हो गई है। महिलाएं और बच्चे सुबह से शाम तक टैंकर आने का इंतजार करते नजर आ रहे हैं। कुछ जगहों पर पानी भरने को लेकर हाथापाई की घटनाएं भी सामने आई हैं।
लोगों का गुस्सा फूटा
प्रभावित इलाकों के निवासियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। कुछ लोगों ने बर्तन फोड़कर नारेबाजी की और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। एक स्थानीय महिला ने बताया, “हर साल गर्मी आते ही यही हाल होता है। टैंकर कभी समय पर नहीं आता। ऐसे नेताओं को अब वोट नहीं देंगे, जो सिर्फ वादे करते हैं।”
प्रशासन की तैयारी
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने उच्च स्तरीय बैठक कर अधिकारियों को टैंकरों की संख्या बढ़ाने और सप्लाई को सुचारू बनाने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम ने 650 से ज्यादा टैंकरों को सड़कों पर उतारा है, लेकिन मांग के मुताबिक सप्लाई अभी भी कम पड़ रही है।
प्रशासन का कहना है कि भेदभाव नहीं किया जा रहा, जबकि लोगों का आरोप है कि टैंकर सिर्फ प्रभावशाली इलाकों या जिन्होंने पैसे दिए, वहां ही प्राथमिकता से पहुंच रहे हैं।