अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बिल पारित कर दिया है, जिसके तहत रूसी कच्चे तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकेगा। भारत भी इन देशों में शामिल है।
यह बिल लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 नाम से जाना जाता है। इसे स्वर्गीय सीनेटर लिंडसे ग्राहम की स्मृति में नामित किया गया है। सीनेट में इस बिल को 86 सांसदों ने समर्थन दिया, जबकि 11 ने विरोध किया।
बिल की मुख्य विशेषताएं
- अमेरिकी राष्ट्रपति को उन पांच सबसे बड़े रूसी ऊर्जा खरीदार देशों से आयात पर अधिकतम 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का अधिकार मिलेगा।
- फिलहाल इन देशों में चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल माने जा रहे हैं।
- अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर छह महीने में इन देशों की सूची की समीक्षा करेंगे।
- रूस से सीधे आने वाले सामान पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रावधान भी है।
- ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को 2031 तक बढ़ाने का प्रावधान भी बिल में शामिल है।
- कुछ यूरोपीय देशों को छूट दी गई है, जो रूसी गैस पर निर्भरता घटा रहे हैं।
भारत के लिए क्या मायने
भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बिल कानून बन जाता है और टैरिफ लागू होते हैं, तो भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।