नेपाल: 7 दिन में 1,127 मौतें, लोग बोले- “भागने का वक्त ही नहीं मिला”

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा अचानक टूटने से आई भयंकर बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। आपदा के लगभग सात दिन बीत जाने के बाद भी मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है। करीब 4,858 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक शव चितवन जिले से मिले हैं। इसके बाद नवलपरासी पूर्व, नवलपरासी पश्चिम और नुवाकोट में भी बड़ी संख्या में शव बरामद हुए हैं। सुरक्षा बलों ने अब तक 6,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है।

अलर्ट में देरी का सवाल

ग्लेशियर सुबह करीब 8:37 बजे टूटा था। बर्फ, चट्टान और मलबे का तेज बहाव भोटेकोशी तथा त्रिशूली नदी घाटियों में फैल गया। कुछ स्थानों पर नदी का जलस्तर आधे घंटे के अंदर ही 7 से 9 मीटर तक बढ़ गया।

नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने घटना के 38 मिनट बाद सुबह 9:15 बजे एसएमएस अलर्ट जारी किया। इसमें लोगों से ऊंची और सुरक्षित जगह पर चले जाने की सलाह दी गई थी। लेकिन कई प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ पहले ही पहुंच चुकी थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी जल्दी बाढ़ आ गई कि भागने का समय ही नहीं मिला। रसुवा जिले के एक पीड़ित ने बताया कि अचानक तेज गड़गड़ाहट सुनाई दी और ऊंची लहरें उनके सामने आ गईं। कई परिवारों को सुरक्षित जगह पहुंचने का मौका नहीं मिला।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा चेतावनी प्रणाली सामान्य बाढ़ के लिए ज्यादा उपयुक्त थी। ग्लेशियर के अचानक टूटने जैसी तेज घटना के लिए यह पर्याप्त साबित नहीं हुई। सीमा पार सूचना साझा करने की व्यवस्था की कमी और कुछ मॉनिटरिंग स्टेशन के बह जाने से भी देरी हुई।

बचाव अभियान और नया खतरा

भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें पनबिजली परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने में जुटी हैं। कई जिलों में दोबारा अचानक बाढ़ आने की आशंका जताते हुए नया अलर्ट भी जारी किया गया है।