संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने आज 1 अक्टूबर 2026 को अपनी स्थापना के पूरे 100 साल पूरे कर लिए। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में आयोजित शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह संस्था देश की गवर्नेंस तय करने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने UPSC को विकसित भारत के निर्माण के लिए जरूरी शासन व्यवस्था का मजबूत स्तंभ बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि UPSC के 100 साल सिर्फ एक संस्था की उम्र नहीं, बल्कि लाखों युवाओं की आकांक्षाओं और पूरे देश के भरोसे का जश्न है। उन्होंने चयन प्रक्रिया में दो मुख्य सिद्धांतों पर जोर दिया- ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘नागरिक प्रथम’। मोदी ने कहा कि सिविल सेवा में आने वाले उम्मीदवारों को सिर्फ ज्ञान ही नहीं, सेवा भाव भी होना चाहिए। समारोह में प्रधानमंत्री ने UPSC शताब्दी स्मारक सिक्का, विशेष डाक टिकट और एक महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन भी किया।
पहले अध्यक्ष अंग्रेज थे
UPSC की जड़ें 1 अक्टूबर 1926 में जुड़ती हैं। उस दिन ली कमीशन की सिफारिशों पर भारत में पहला पब्लिक सर्विस कमीशन बना था। इसके पहले अध्यक्ष सर रॉस बार्कर थे, जो ब्रिटिश अधिकारी थे। शुरुआती वर्षों में आयोग के अध्यक्ष और सदस्य लंदन से नियुक्त होते थे।
नाम दो बार बदला
संस्था का नाम समय के साथ दो बार बदला गया:
- 1926 में इसे पब्लिक सर्विस कमीशन कहा गया।
- 1937 में इसे फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन नाम मिला।
- 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद यह संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) बन गया।