राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने गुरुवार को यहां एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी को अपने नारे में यह जोड़ देना चाहिए कि लोकतंत्र को भाजपा सरकार से भी बचाना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राहुल गांधी द्वारा दी गई बहस की चुनौती स्वीकार करने और वोट चोरी के आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की जयंती के अवसर पर सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में आयोजित कवि सम्मेलन और मुशायरे में भाग लेने के बाद प्रतापगढ़ी ने मीडिया से बात की। उन्होंने भाजपा के अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि अराजकता की सही परिभाषा समझना जरूरी है। उनके मुताबिक, सत्ता में रहते हुए चुनाव आयोग की सहायता से जनता के वोट छीनना और उसी के बल पर शासन चलाना अराजकता है। छात्रों पर बल प्रयोग, विपक्षी आवाज दबाना और संसद सत्र में शीर्ष नेताओं की अनुपस्थिति भी इसी श्रेणी में आती है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि विपक्ष लाखों लोगों के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा है। न कोई हिंसा हो रही है, न झड़प। ऐसे में इसे अराजकता कहना गलत है। उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह का जिक्र करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने भी उस समय इसी तरह के आरोप लगाए होंगे। भाजपा को ऐसी व्याख्याएं गढ़ना बंद करना चाहिए।
राहुल गांधी की चुनौती पर जोर
प्रतापगढ़ी ने कहा कि वोट चोरी के मुद्दे पर राहुल गांधी देशभर में जनता के गुस्से को आवाज दे रहे हैं। प्रधानमंत्री को उनकी बहस की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए। राहुल गांधी ने जगह, मंच और जज चुनने की आजादी दी है। नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री लगभग बराबर स्तर के पद हैं। प्रधानमंत्री को सामने आकर बताना चाहिए कि 13 करोड़ से अधिक वोट कैसे हटाए गए और क्या वास्तव में वोट चोरी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग के प्रमुख पर सवाल उठते ही भाजपा के केंद्रीय मंत्री जवाब देने क्यों आ जाते हैं।
रैली की भीड़ पर प्रतिक्रिया
राहुल गांधी की रैली में आई भीड़ के आंकड़ों पर भाजपा नेताओं की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए प्रतापगढ़ी ने कहा कि भाजपा वाले खुद कुर्सियां गिन रहे थे। पहले प्रधानमंत्री ‘कौन राहुल’ कहते थे, अब उनकी रैली की भीड़ गिनवाने पर मजबूर हो गए हैं। यही राहुल गांधी की ताकत है।