PWD की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे रहवासी
भोपाल: राजधानी के विकसित इलाके नीलबड़ से रातीबड़ रोड पर करीब ढाई किलोमीटर लंबे मार्ग पर साढ़े चार करोड़ रुपए की लागत से लगाई गई स्ट्रीट लाइटें एक साल बाद भी बंद पड़ी हैं। करीब एक साल पहले दीपावली के दिन इन लाइटों की टेस्टिंग तो हुई थी और करीब 4 घंटे तक इन्हें चालू रखा गया था। लेकिन त्योहार के बाद से आज तक ये लाइटें दोबारा नहीं जलीं। ऐसे में जनता के 4.50 करोड़ रुपए यूं ही बर्बाद होते नजर आ रहे हैं। अब नतीजा यह है कि यह पूरी सड़क अंधेरे में डूबी रहती है, जिससे रोजाना वाहन चालक और राहगीर हादसों के शिकार हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद स्ट्रीट लाइट्स लगाने के बाद नगर निगम प्रशासन और लोक निर्माण विभाग ने इस ओर दोबारा ध्यान नहीं दिया। क्षेत्र के रहवासी बताते हैं कि रात के समय यह सड़क बेहद खतरनाक हो जाती है। भारी वाहनों की आवाजाही के बीच कई बार दोपहिया वाहन फिसलने से दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। सड़क किनारे के कई हिस्सों में गड्ढे और टूटे किनारे भी हादसों की वजह बन रहे हैं।
विभाग नहीं कर रहा हैंडओवर
रातीबड़ पंचायत के सरपंच अजय राजौरिया का कहना है कि करीब एक साल पहले दीवाली के दिन इन लाइटों को चैक करके शुरू किया गया था, उसके बाद से यह लाइटें दोबारा कभी नहीं चालू की गई। हमने लोक निर्माण विभाग के अफसरों से कहा था कि इन लाइटों को हमें हैंडओवर कर दें, तो हम इसे चालू कर देंगे।
रात में ज्यादा परेशानी
रात में अंधेरा इतना गहरा रहता है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। स्थानीय दुकानदारों और रहवासियों ने कई बार जिम्मेदार विभागों को इसकी शिकायतें की है, लेकिन अभी तक किसी ने सुध नहीं ली। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अगर लाइटों की मरम्मत कर दी जाए, तो त्योहारी सीजन में राहत मिल सकती है। यह मार्ग यानी नीलबड़ से रातीबड़ होते हुए हजारों लोग रोजाना भोपाल से सीहोर, देवास, उज्जैन और इंदौर सहित अनेक रूटों पर आवाजाही करते हैं। ऐसे में इस मार्ग में स्ट्रीट लाइट्स लगने के बाद भी चालू नहीं होने से तमाम सवाल उठ रहे हैं। दूसरे शहरवासियों के सामने भोपाल के स्थानीय प्रशासन की साख भी खराब हो रही है।