भोपाल: राजभवन ने महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट में प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति के ओएसडी प्रो. आलोक चौबे को नियुक्त किया है। प्रो. चौबे तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रोफेसर हैं।
यह पांचवा मौका है जब तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रोफेसर को किसी पारंपरिक विश्वविद्यालय में कुलगुरु के तौर पर नियुक्त किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्राधिकार में डेढ दर्जन विश्वविद्यालय हैं। इसमें करीब आधा दर्जन विवि में तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रोफेसरों को नियुक्त किया है। शिक्षाविदों का कहना है कि पारंपरिक विश्वविद्यालय में पारंपरिकत विषयों के जानकार को ही कुलगुरु नियुक्त होना चाहिए क्योंकि वे विवि द्वारा संचालित कोर्स का अध्ययन और उनकी उपयोगिता को बेहतर तरीके से संचालित करा पाते हैं। राजभवन द्वारा लागतार तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रोफेसरों को नियुक्त करता जा रहा है। जबकि आरजीपीवी में प्रदेश के प्रोफेसर को छोड़कर प्रयागराज एनआईटी के निदेशक राजीव त्रिपाठी को कुलगुरु नियुक्त किया गया है। यहां भी राजभवन को तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रोफेसर को नियुक्त करना राजभवन ने क्यों जरुरी नहीं समझा।
झांसी विवि में नियुक्त हैं पांडे
आरजीपीवी के प्रोफेसर मुकेश पांडे को झांसी विवि में कुलपति के तौर नियुक्त किया गया है। यह उनका झांसी विवि में दूसरा कार्यकाल है। इस तरह से तकनीकी शिक्षा विभाग के आधा दर्जन प्रोफेसर कुलगुरु की कुर्सी पर आसीन हैं।
भोपाल में तीन नियुक्तियां
तीन तकनीकी प्रोफेसर प्रदेश की राजधानी में नियुक्त किए गए हैं। इसमें बीयू में प्रो जैन, भोज में प्रो दांडेकर और हिंदी विवि में प्रो हिंडोलिया पद हैंं। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी प्रोफेसरों की प्रोफाइल बहुत बढ़िया हैं। उनके रिसर्च वर्क और विवि को आगे बढ़ाने का विजन राजभवन को प्रभावित करता है। उच्च शिक्षा विभाग के प्रोफेसर तो अपना रिसर्च वर्क तक अच्छे से प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए उन्हें स्कू्रटनी में ही बाहर किया जा रहा है।