कर्नाटक में CM कुर्सी की रार तेज, जरकिहोली ने शिवकुमार को दी खुली चेतावनी!

कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर कांग्रेस के अंदर चल रहा घमासान किसी भी सूरत में शांत होने का नाम नहीं ले रहा। पार्टी के भीतरी कलह के बीच यह आशंका भी जताई जा रही है कि इस उठापटक का फायदा कोई तीसरी ताकत उठा सकती है। कांग्रेस में जारी इस उठा-पटक को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह सतर्क मोड में नजर आ रही है।

राज्य के पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक रमेश जरकिहोली ने साफ शब्दों में कहा है कि भाजपा को कांग्रेस सरकार को गिराने की कोई कोशिश नहीं करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार कभी भाजपा में शामिल होते हैं तो उन्हें (जरकिहोली को) दूसरा राजनीतिक रास्ता तलाशना पड़ेगा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या शिवकुमार भाजपा के समर्थन से सरकार बना सकते हैं, तो जरकिहोली ने इसका पुरजोर खंडन किया। उन्होंने कहा, “ऐसी कोई संभावना नहीं है। लेकिन अगर कभी ऐसा हुआ भी तो मैं इस जन्म में उन्हें अपना नेता स्वीकार नहीं कर पाऊंगा।” उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस में डी.के. शिवकुमार के पास विधायकों का बहुमत नहीं है, वरना वह अब तक मुख्यमंत्री बन चुके होते।

जरकिहोली ने भाजपा नेतृत्व से अपील की कि वह इस पूरे मामले में तटस्थ रहे और किसी भी तरह की दखलअंदाजी से बचे। उनके मुताबिक, “यह कीचड़ का दलदल है, हमें इसमें नहीं कूदना चाहिए।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अंदर पावर शेयरिंग को लेकर भ्रम की स्थिति है और कुछ नेता सिद्धारमैया को हटाकर खुद कुर्सी हथियाने की जुगत में हैं। ऐसे में भाजपा को चुपचाप इंतजार करना चाहिए और अगले चुनाव में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटना चाहिए।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अभी कांग्रेस के पास जनादेश है, इसलिए उसे अपना कार्यकाल पूरा करने देना चाहिए। बार-बार चुनाव कराना राज्य के हित में नहीं है। जरकिहोली का मानना है कि यदि कांग्रेस ढाई साल और सत्ता में रही तो जनता में उसकी नीतियों के खिलाफ भारी आक्रोश होगा, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा और लोग स्वतः उसे चुनेगे।

इधर, डी.के. शिवकुमार के समर्थक विधायकों का एक दल फिर दिल्ली पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार रविवार रात कम से कम छह विधायक राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे हैं और जल्द ही कुछ और विधायक भी वहां जा सकते हैं। इन विधायकों की मांग है कि शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाए।

वहीं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मीडिया से कहा, “हम आलाकमान के हर फैसले को शिरोधार्य करेंगे। अगर पार्टी चाहेगी कि मैं पद पर बना रहूं तो मैं रहूंगा और यदि बदलाव का फैसला हुआ तो मैं उसे सहर्ष स्वीकार करूंगा। डी.के. शिवकुमार को भी आलाकमान का फैसला मानना होगा।”