भोपाल नगर निगम (बीएमसी) ने हाल ही में आयोजित मेयर इन कौंसिल (एमआईसी) की बैठक में अमृत 2.0 परियोजना के अंतर्गत अपने हिस्से की अंशदान राशि जुटाने के लिए ग्रीन म्युनिसिपल बांड (Green Municipal Bonds) के माध्यम से वित्तपोषण करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह कदम बीएमसी की वित्तीय मजबूती और टिकाऊ शहरी विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
ग्रीन म्युनिसिपल बांड क्या हैं?
ग्रीन म्युनिसिपल बांड एक प्रकार के ऋण साधन होते हैं, जिन्हें नगर निगम या स्थानीय सरकारी संस्थाएं जारी करती हैं। इन बांड्स से जुटाई गई धनराशि को विशेष रूप से पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ (Environmental Sustainable) परियोजनाओं में निवेश किया जाता है। इन परियोजनाओं में स्वच्छ जल आपूर्ति, अपशिष्ट जल प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण, नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर ऊर्जा) और हरित परिवहन (जैसे ई-बसें) शामिल हो सकते हैं।
अमृत 2.0 और बांड का उद्देश्य
अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT) 2.0 का उद्देश्य देश के शहरों में पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करना और शहरी विकास को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत नगर निगमों को अपनी परियोजनाओं के लिए एक निश्चित अंशदान देना होता है। बीएमसी ने इसी अंशदान राशि को जुटाने के लिए पारंपरिक ऋण लेने के बजाय ग्रीन बांड का रास्ता चुना है।
- वित्त जुटाना: बांड जारी करने से नगर निगम को कम ब्याज दर पर बड़ी राशि जुटाने में मदद मिलती है, जिससे वह केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत अपनी परियोजनाओं को समय पर पूरा कर सकता है।
- पर्यावरणीय प्रतिबद्धता: ग्रीन बांड जारी करके भोपाल नगर निगम अपनी परियोजनाओं के लिए वित्तीय जिम्मेदारी लेते हुए यह स्पष्ट करता है कि उसका ध्यान पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण पर है।
- निवेशकों को आकर्षित करना: यह बांड पर्यावरण के प्रति जागरूक निवेशकों (Environmental, Social, and Governance – ESG Investors) को आकर्षित करता है, जो सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ वाली योजनाओं में निवेश करना पसंद करते हैं।
इस प्रस्ताव की मंजूरी के बाद, बीएमसी जल्द ही अपने ग्रीन म्युनिसिपल बांड जारी करने की प्रक्रिया शुरू करेगा, जो संभवतः इंदौर के बाद मध्य प्रदेश का दूसरा नगर निगम बन जाएगा जो इस तरह का टिकाऊ वित्तपोषण मॉडल अपनाएगा।