उच्च शिक्षा का नया ‘पावर हाउस’; NEP लागू करने में देश का अव्वल राज्य बना

मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी जगह पक्की कर ली है। उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विभाग की उपलब्धियों का ब्यौरा देते हुए बताया कि प्रदेश अब शिक्षा के पुराने ढर्रे को छोड़कर आधुनिक और लचीली शिक्षा प्रणाली की ओर बढ़ चुका है।

विषय चयन में ‘फ्रीडम’ और आधुनिक कोर्स

नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को अब पारंपरिक बंधनों से मुक्ति मिल गई है। मंत्री परमार के अनुसार, छात्र अब न केवल अपनी पसंद के विषय चुन सकेंगे, बल्कि पढ़ाई के दौरान जरूरत पड़ने पर उन्हें बदलने की पूरी आज़ादी भी होगी। इसके साथ ही, तकनीक के युग को देखते हुए प्रदेश के 68 कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे भविष्योन्मुखी कोर्स शुरू किए गए हैं।

प्रदेश में शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़े निवेश किए हैं:

: उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए गुना, खरगोन और सागर में तीन नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई है।

प्रदेश के 55 कॉलेजों को ‘प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में अपग्रेड किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर सरकार ने ₹336 करोड़ खर्च किए हैं, ताकि छात्रों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें।

मेधावी छात्रों को ₹750 करोड़ का संबल

आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन पढ़ाई में अव्वल छात्रों के लिए ‘मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना’ एक वरदान साबित हुई है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 78 हजार छात्रों को इस योजना के जरिए ₹750 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई है, ताकि धन के अभाव में किसी की प्रतिभा न दबे।

2003 से अब तक: विकास की ऊंची उड़ान

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री इंदर सिंह परमार ने पिछले दो दशकों के विकास कार्यों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 2003 के बाद से मध्यप्रदेश ने शिक्षा और विकास के क्षेत्र में जो गति पकड़ी है, उसी का परिणाम है कि आज प्रदेश देश के लिए एक रोल मॉडल बन गया है।