ईरान के भीतर हफ्तों से सुलग रहा जनाक्रोश अब एक ऐसी ज्वाला का रूप ले चुका है जिसकी तपिश पूरी दुनिया में महसूस की जा रही है। आर्थिक बदहाली और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ शुरू हुआ यह विद्रोह अब एक भयावह खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया है। तेहरान से लेकर लॉरदेगन तक की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों और सरकारी सुरक्षा बलों के बीच हो रही सीधी गोलीबारी और तेजी से बढ़ते मौत के आंकड़ों ने न केवल ईरान को झकझोर दिया है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र सहित तमाम वैश्विक शक्तियों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।
लॉरदेगन जैसे शहरों से आ रही खबरें रूह कंपा देने वाली हैं, जहां सुरक्षा बलों द्वारा उग्र भीड़ को रोकने के लिए किए गए बल प्रयोग ने स्थिति को पूरी तरह अनियंत्रित कर दिया है। फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई आमने-सामने की भिड़ंत में आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर कड़े प्रतिबंधों के बावजूद लीक हो रहे वीडियो में सड़कों पर कई शव पड़े होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर आंकड़ों को सीमित रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन एक सुरक्षाकर्मी की मौत की पुष्टि और दर्जनों नागरिकों के हताहत होने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
इस विद्रोह की मशाल किसी एक तात्कालिक घटना से नहीं, बल्कि सालों से जमा हो रहे जनता के गुस्से से जली है। रिकॉर्ड स्तर पर गिरती ईरानी मुद्रा और कमरतोड़ महंगाई ने सबसे पहले मध्यम वर्ग और व्यापारियों को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया और जब विश्वविद्यालयों के छात्रों ने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया, तो इसने एक वैचारिक क्रांति का रूप ले लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह ईरान के इतिहास का वह नाजुक मोड़ है जहां वर्तमान शासन की नींव बुरी तरह हिल गई है। सरकार द्वारा सूचनाओं के प्रवाह को रोकने के लिए इंटरनेट पर सख्त पाबंदी लगाने के बावजूद ‘बदलाव’ की गूंज दबने का नाम नहीं ले रही है।
ईरान की सड़कों पर बह रहे खून ने वैश्विक स्तर पर भी कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विभिन्न निकायों ने ईरान सरकार से तुरंत हिंसा रोकने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी न करने की कड़ी अपील की है। मध्य-पूर्व के एक प्रमुख देश में इस तरह की अस्थिरता ने कच्चे तेल की कीमतों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर पश्चिमी देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। वर्तमान में ईरान में स्थिति “करो या मरो” वाली बनी हुई है, जहां चक्का जाम, बंद स्कूलों और सूने बाजारों के बीच केवल गोलियों की तड़तड़ाहट और सरकार विरोधी नारे सुनाई दे रहे हैं। अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह विद्रोह किसी समझौते पर थमता है या ईरान के राजनीतिक भूगोल को पूरी तरह बदल देता है।