भारतीय उद्योग जगत में निवेश की रफ़्तार ने पिछले सभी रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा की ताज़ा आर्थिक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में देश में निवेश के इरादों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। इस अवधि में कुल ₹26.62 लाख करोड़ के नए निवेश प्रस्तावों की घोषणा की गई है, जो पिछले साल की इसी अवधि में घोषित ₹23.88 लाख करोड़ के मुकाबले लगभग 11.5 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभूतपूर्व वृद्धि केंद्र सरकार के उस सकारात्मक नीतिगत ढांचे का परिणाम है, जिसमें बुनियादी ढांचे पर भारी पूंजीगत व्यय (कैपेक्स), आयकर की कम दरों और जीएसटी 2.0 जैसे रिफॉर्म्स पर विशेष ध्यान दिया गया है।
इस बार के निवेश चक्र की सबसे खास बात यह है कि इसकी कमान पूरी तरह से भारी उद्योगों और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के हाथों में है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कुल निवेश घोषणाओं का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा केवल पांच प्रमुख क्षेत्रों से आया है। इसमें बिजली क्षेत्र 22.6 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ सबसे शीर्ष पर है, जहाँ रिन्यूएबल एनर्जी यानी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं ने निवेशकों को सबसे ज्यादा आकर्षित किया है। बिजली के बाद केमिकल क्षेत्र 21.8 प्रतिशत और मेटल क्षेत्र 17.3 प्रतिशत के साथ अग्रणी बने हुए हैं। यह रुझान स्पष्ट करता है कि देश में कैपिटल गुड्स और औद्योगिक बुनियादी ढांचे की नींव बेहद मजबूत हो रही है। हालांकि, उपभोक्ता-केंद्रित क्षेत्रों का योगदान फिलहाल 3 प्रतिशत से भी कम रहा है, जो यह संकेत देता है कि वर्तमान कैपेक्स चक्र पूरी तरह से आपूर्ति पक्ष को सुदृढ़ करने के लिए है।
भौगोलिक दृष्टि से निवेश का केंद्र दक्षिण और पूर्वी भारत के राज्यों की ओर अधिक झुका नजर आ रहा है। निवेश के इरादों के मामले में आंध्र प्रदेश 25.3 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ देश का नंबर-1 राज्य बनकर उभरा है। इसके बाद क्रमशः ओडिशा (13.1 प्रतिशत), महाराष्ट्र (12.8 प्रतिशत), तेलंगाना (9.5 प्रतिशत) और गुजरात (7.1 प्रतिशत) का स्थान आता है। इन पांच राज्यों ने मिलकर देश के कुल प्रस्तावित निवेश का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा अपनी ओर खींचा है। इनके अलावा तमिलनाडु, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी औद्योगिक विस्तार की नई संभावनाओं ने जन्म लिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार के कैपेक्स पुश और ब्याज दरों में गिरावट के रुझान ने वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय बाजार को निवेश के लिए सबसे सुरक्षित और आकर्षक स्थान बना दिया है।
आने वाले समय के लिए बाजार विशेषज्ञों का दृष्टिकोण बेहद आशावादी है। रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि जैसे-जैसे घरेलू खपत में सुधार होगा और औद्योगिक उत्पादन क्षमता का उपयोग बढ़ेगा, निवेश की यह प्रक्रिया सभी राज्यों और क्षेत्रों में अधिक व्यापक रूप से फैल जाएगी। साथ ही, गिरती ब्याज दरें आने वाले महीनों में निवेश की गतिविधियों को और अधिक गति प्रदान करेंगी, जिससे चालू वित्त वर्ष के अंत तक निवेश का माहौल पूरी तरह से सकारात्मक बना रहने की उम्मीद है।