मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पिछले पांच वर्षों से ‘कोर्ट फीस’ के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की जा रही थी। इस बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा होने के बाद अब उन तमाम याचिकाओं की बारीकी से जांच शुरू कर दी गई है, जिनमें फीस की रसीद तो लगी है, लेकिन सरकारी खजाने में पैसा नहीं पहुँचा है।
तकनीकी खामी का फायदा उठाकर किया गया फर्जीवाड़ा
यह पूरा मामला साल 2020 में शुरू हुई ऑनलाइन कोर्ट फीस जमा करने की व्यवस्था से जुड़ा है। जांच में सामने आया है कि कुछ अधिवक्ताओं के मुंशियों ने सिस्टम की एक बड़ी तकनीकी खामी का दुरुपयोग किया। जब कोई अधिवक्ता याचिका पेश करता है, तो उसके लिए एक ‘प्रोविजनल नंबर’ जनरेट होता है। नियमानुसार, फीस जमा होने के बाद ही यह नंबर ‘पेमेंट आईडी’ में तब्दील होता है।
आरोप है कि मुंशियों ने वकीलों के दफ्तरों से फीस की नगद राशि तो ली, लेकिन उसे साइबर ट्रेजरी में जमा करने के बजाय खुद रख लिया। उन्होंने केवल प्रोविजनल नंबर जनरेट कर उसे ही अंतिम रसीद के तौर पर याचिका के साथ नत्थी कर दिया। हैरत की बात यह है कि पिछले पांच सालों में ऐसी सैकड़ों याचिकाओं पर न केवल सुनवाई हुई, बल्कि कई मामलों में अंतिम फैसले भी आ गए, जबकि उनकी वैधानिक फीस कभी जमा ही नहीं हुई थी।
विशेषज्ञ दल करेगा 2020 से 2025 तक का ऑडिट
हाईकोर्ट प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेषज्ञ दल का गठन किया है। यह टीम अब 2020 से लेकर 2025 तक के डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट और ट्रेजरी चालानों का मिलान कर रही है। हालांकि, हाईकोर्ट की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक यह घोटाला करोड़ों रुपये का हो सकता है।
बार एसोसिएशन ने की जेल भेजने की मांग
इस खुलासे के बाद वकीलों और बार एसोसिएशन में भी भारी नाराजगी है। ग्वालियर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन पाठक ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह न्याय के मंदिर के साथ किया गया एक बड़ा विश्वासघात है। उन्होंने मांग की है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले मुंशियों और यदि कोई अन्य इसमें संलिप्त है, तो उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
वर्तमान में, विशेषज्ञ दल इस बात की पड़ताल कर रहा है कि इस फर्जीवाड़े में कितने अधिवक्ताओं की आईडी का इस्तेमाल हुआ और क्या इस खेल में विभाग के भीतर का भी कोई व्यक्ति शामिल था।