एलोन मस्क की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी xAI के चैटबॉट ‘ग्रोक’ (Grok AI) पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकट गहरा गया है। भारत द्वारा अश्लील कंटेंट को लेकर दी गई कड़ी चेतावनी के बाद अब ब्रिटेन ने भी इस एआई टूल के खिलाफ औपचारिक जांच का ऐलान कर दिया है। यह कार्रवाई ग्रोक के जरिए महिलाओं और बच्चों की आपत्तिजनक ‘डीपफेक’ तस्वीरें बनाने और साझा करने के आरोपों के बाद की गई है।
ब्रिटेन में ऑफकॉम की बड़ी कार्रवाई
ब्रिटेन के ऑनलाइन सुरक्षा रेगुलेटर Ofcom ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के खिलाफ औपचारिक जांच शुरू करते हुए यह स्पष्ट किया है कि यह कदम देश के नए ‘ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट’ के तहत उठाया गया है। जांच का मुख्य केंद्र ग्रोक का वह नया इमेज एडिटिंग फीचर है, जिसका दुरुपयोग कर बिना सहमति के अश्लील और अपमानजनक तस्वीरें तैयार की जा रही हैं। यदि जांच में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन साबित होता है, तो X पर उसकी वैश्विक वार्षिक आय का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है या ब्रिटेन में उसकी सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध भी लग सकता है।
भारत में आईटी नियमों का उल्लंघन और ‘X’ का कबूलनामा
भारत में भी केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ग्रोक द्वारा उत्पन्न अश्लील सामग्री को आईटी नियम 2021 का उल्लंघन करार दिया है। बढ़ते सरकारी दबाव के बीच X ने भारतीय अधिकारियों के समक्ष अपनी गलती स्वीकार की है और आश्वासन दिया है कि वह भविष्य में स्थानीय कानूनों का पूरी तरह पालन करेगा। डेटा के मुताबिक, कंपनी ने विवादित सामग्री से जुड़ी हजारों पोस्ट हटा दी हैं और इस मामले में संलिप्त सैकड़ों खातों को ब्लॉक किया है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ता विरोध और प्रतिबंध
वैश्विक स्तर पर ग्रोक के खिलाफ आक्रोश केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं है। इंडोनेशिया और मलेशिया ने पहले ही इस एआई सेवा पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि यूरोपीय संघ (EU) ने X को आदेश दिया है कि वह जांच के लिए ग्रोक से संबंधित सभी आंतरिक डेटा और दस्तावेजों को सुरक्षित रखे। मस्क ने हालांकि इन कार्रवाइयों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रेगुलेटर्स इसे सार्वजनिक सुरक्षा और प्राइवेसी का गंभीर मामला मान रहे हैं।
सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम
बचाव के तौर पर X ने फिलहाल ग्रोक के इमेज जनरेशन फीचर को केवल अपने ‘प्रीमियम सब्सक्राइबर्स’ तक ही सीमित कर दिया है। हालांकि, विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह अंतरराष्ट्रीय शिकंजा आने वाले समय में अन्य एआई कंपनियों के लिए भी सख्त नियमन की राह तैयार करेगा।