अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टोल वसूलने की संभावना जताई है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान के साथ 60 दिनों में अंतिम समझौता नहीं हो पाया तो अमेरिका खुद इस रणनीतिक जलमार्ग पर शुल्क लगा सकता है। इसका मकसद मध्य पूर्व में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के खर्च की भरपाई करना है। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में महत्वपूर्ण बातचीत शुरू हो रही है।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि युद्धविराम की 60 दिन की अवधि के दौरान होर्मुज में कोई टोल नहीं लगेगा। उसके बाद भी कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा, जब तक अमेरिका खुद इसे लागू न करे। उन्होंने इसे “मिडिल ईस्ट के देशों के लिए गार्जियन एंजेल” की भूमिका निभाने के पुराने, वर्तमान और भविष्य के खर्च की वसूली बताया।
ईरान का दावा और विवाद
ईरान ने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का ऐलान किया था, जिसे इजराइल के लेबनान में हमलों का जवाब बताया गया। अमेरिकी सेना ने इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि कई जहाज पहले ही इस मार्ग से गुजर चुके हैं। इस घटनाक्रम ने हालिया अंतरिम समझौते को नई चुनौती दी है, जिसमें 60 दिनों तक होर्मुज को टोल-फ्री रखने का प्रावधान है।
स्विट्जरलैंड में उच्चस्तरीय वार्ता
रविवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका-ईरान की वार्ता शुरू हो गई है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरानी पक्ष का नेतृत्व संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर घालिबाफ के हाथों में है। पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
वार्ता का मुख्य मुद्दा अंतरिम समझौते (14-पॉइंट MOU) को लागू करना, परमाणु कार्यक्रम, लेबनान में तनाव कम करना और होर्मुज की स्थिति है। स्विस विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि दोनों पक्ष और मध्यस्थ मौजूद हैं।