IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। उन्होंने हजारों स्नातकों को संबोधित करते हुए युवाओं से अपील की कि वे केवल प्रश्न न उठाएं, बल्कि उनके हल भी निकालें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले तीन से साढ़े तीन दशक में ये छात्र जो कदम उठाएंगे, वही विकसित भारत की नींव मजबूत करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर फैसले में यह सोचना जरूरी है कि उससे देश को कितना लाभ पहुंचेगा और कौन-सी राष्ट्रीय जरूरत पूरी होगी।
इस समारोह में तीन हजार से अधिक विद्यार्थियों को डिग्री मिली, जिनमें सैकड़ों पीएचडी शोधार्थी भी शामिल थे। प्रधानमंत्री ने मेधावी छात्रों को संस्थान के सर्वोच्च सम्मान राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक समेत अन्य पदक प्रदान किए। उन्होंने IIT दिल्ली के सोनीपत परिसर में स्थापित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुपरकंप्यूटिंग सुविधा ‘परम प्रज्ञा’ का भी उद्घाटन किया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने जीवन की परीक्षा को कक्षा की परीक्षा से अलग बताया। उन्होंने कहा कि जिंदगी में कोई निर्धारित पाठ्यक्रम नहीं होता। कई बार असली समस्या को खुद पहचानना पड़ता है। IIT के पूर्व छात्रों की सफलता का राज यही था कि उन्होंने उन सवालों को खोजा जिन्हें दुनिया ने नजरअंदाज कर दिया था।
उन्होंने निरंतर सीखने पर जोर देते हुए कहा कि बदलती तकनीक और उद्योगों के दौर में वही आगे बढ़ेगा जो सीखता रहेगा। आर्थिक, तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बताते हुए उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश की जरूरतों के अनुरूप नवाचार करें।