फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने आखिरी भाषण में गाजा की मौजूदा हालात को पूरी दुनिया के लिए शर्म की बात करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि वहां के आम लोग अभी भी साफ पानी, जरूरी दवाओं और राहत सामग्री की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। महज शांति की घोषणा से जमीनी हकीकत नहीं बदलती।
मैक्रों का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उसी मंच से दिए गए भाषण के कुछ घंटों बाद आया। ट्रम्प ने दावा किया था कि गाजा में युद्ध समाप्त हो चुका है और उनकी 20-सूत्रीय शांति योजना सफल रही, जिससे हजारों जिंदगियां बच गईं। मैक्रों ने इस दावे पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि तथाकथित शांति के बावजूद एक भी मानवीय गलियारा फिर से नहीं खोला गया है।
उन्होंने जोर देकर कहा, “एक साल पहले इसी हॉल में करीब एक दर्जन देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दी थी। कुछ लोग इसे सिर्फ कागजी कार्रवाई बताते हैं। लेकिन अगर हम गाजा के प्रति निष्क्रिय बने रहे तो हमारी विश्वसनीयता कहां रह जाएगी? कुछ लोग शांति का गुणगान कर रहे हैं, लेकिन उस शांति ने मानवीय सहायता की राह एक पल के लिए भी नहीं खोली। क्या हम चुपचाप खड़े रहकर इस तमाशे को देखते रहेंगे जो हम सबके लिए शर्मनाक है?”
मैक्रों ने पोडियम पर मुक्का मारते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ठोस कार्रवाई की अपील की। उन्होंने कहा कि सिर्फ मान्यता देना काफी नहीं है। पश्चिमी तट में हो रहे उल्लंघनों पर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि ये फिलिस्तीनी राज्य की संभावना को कमजोर कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने बहुपक्षीय व्यवस्था का समर्थन करते हुए चेतावनी दी कि दुनिया को ‘जंगल के कानून’ की ओर नहीं लौटना चाहिए।
व्हाइट हाउस ने मैक्रों की आलोचना का जवाब देते हुए ट्रम्प का बचाव किया। प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने इजरायल और हमास के बीच युद्ध रुकवाया, सभी जीवित बंधकों को आजाद करवाया, मारे गए बंधकों के शव परिवारों तक पहुंचाए और अब गाजा के लिए 20-सूत्रीय शांति योजना को लागू कर रहे हैं।