कर्नाटक: बिना क्लिनिक गए हर महीने ₹70 हजार! कांग्रेस विधायक की भतीजी का बड़ा खेल उजागर

कर्नाटक के बागलकोट जिले में नम्मा क्लिनिक की मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यारगल के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं। उन पर कहा जा रहा है कि वे करीब छह महीने तक क्लिनिक में ड्यूटी पर नहीं गईं, फिर भी मासिक वेतन 70 से 75 हजार रुपये तक लेती रहीं। इसी दौरान वे एक निजी मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएट (MD) की पढ़ाई भी कर रही थीं।

डॉ. अंकिता बागलकोट के कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी और जिले के जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजकुमार यारगल की बेटी हैं। अप्रैल 2025 में उन्हें वाम्बे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लिनिक में संविदा आधार पर मेडिकल ऑफिसर के पद पर नियुक्त किया गया था।

जिला पंचायत के सीईओ गजानन बाले के नोटिस के मुताबिक, मार्च 2026 की शुरुआत से सितंबर तक वे क्लिनिक में अनुपस्थित रहीं। इस वजह से क्लिनिक बिना डॉक्टर के चल रहा था और मरीजों को परेशानी हो रही थी। नर्सें ही काम संभाल रही थीं। आरोप है कि उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दिए बिना पूर्णकालिक पीजी कोर्स शुरू कर दिया था और सरकारी वेतन भी लेती रहीं।

मामला सामने आने के बाद डीएचओ डॉ. राजकुमार यारगल ने अपनी बेटी को ड्यूटी से मुक्त कर दिया। उन्होंने बताया कि नियुक्ति पिछले डीएचओ के समय हुई थी और उन्होंने खुद सैलरी जारी नहीं की। जांच शुरू हो चुकी है। डॉ. अंकिता पहली सुनवाई में नहीं पहुंचीं। अब 18 सितंबर को दस्तावेजों के साथ पेश होने को कहा गया है। अधिकारियों ने कहा है कि अनुपस्थिति के दौरान ली गई सैलरी वसूल की जा सकती है और मेडिकल काउंसिल के जरिए आगे की कार्रवाई भी संभव है।