बिहार देश के उन राज्यों में शुमार है जहां बाढ़ सबसे ज्यादा तबाही मचाती है। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ प्रभावित जोन में आता है। करीब 94 हजार वर्ग किलोमीटर के कुल क्षेत्रफल में से लगभग 68,800 वर्ग किलोमीटर इलाका हर साल बाढ़ के खतरे से जूझता है।
बाढ़ रोकथाम और सिंचाई संबंधी कार्यों पर राज्य सरकार हर साल बड़ी रकम खर्च करती है। 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण मद में करीब 6,594 करोड़ रुपये खर्च हुए। पिछले कुछ वर्षों (2020 के बाद) में बाढ़ सुरक्षा पर कुल मिलाकर 5,100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद उत्तर बिहार के कई जिले नियमित रूप से बाढ़ की चपेट में आते रहते हैं।
नेपाल से निकलने वाली कोसी, गंडक और घाघरा जैसी नदियों में अचानक पानी बढ़ने तथा तल में गाद जमा होने से स्थिति बार-बार बिगड़ जाती है। इससे फसलें बर्बाद होती हैं, घर क्षतिग्रस्त होते हैं और लाखों लोग प्रभावित होते हैं। नुकसान का आंकड़ा हर साल हजारों करोड़ में पहुंच जाता है।
उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ का संकट बना हुआ है। गंगा, शारदा सहित लगभग 15 नदियां खतरे के निशान के करीब या उससे ऊपर बह रही हैं। गोंडा, बाराबंकी, उन्नाव और कुशीनगर समेत कई जिलों में गांव टापू बन गए हैं तथा हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन राहत और बचाव अभियान चला रहा है।