धनतेरस 2026: समृद्धि, स्वास्थ्य और शुभ आरंभ का पावन पर्व

दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत इसी दिन से होती है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व धन, स्वास्थ्य और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

धनतेरस का महत्व

‘धन’ का अर्थ है संपत्ति और ‘तेरस’ का मतलब त्रयोदशी तिथि। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना भी की जाती है।

यम दीपदान भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर एक दीपक जलाकर यमराज को प्रसन्न किया जाता है, ताकि परिवार को अकाल मृत्यु से सुरक्षा मिले।

पूजा का शुभ मुहूर्त

त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर सुबह करीब 10:30 बजे शुरू होकर 7 नवंबर सुबह लगभग 10:47 बजे तक रहती है। पूजा प्रदोष काल में करने का विशेष महत्व है। नई दिल्ली के अनुसार लक्ष्मी-कुबेर पूजा का शुभ समय शाम 6:02 से 7:57 बजे तक है। प्रदोष काल शाम 5:33 से 8:09 बजे तक रहता है। अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त के समय के अनुसार मुहूर्त थोड़ा बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर है।

खरीदारी का महत्व

धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन, नई वस्तुएं या घर के लिए कोई भी धातु का सामान खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई चीजें घर में समृद्धि लाती हैं। कई परिवार झाड़ू भी खरीदते हैं, क्योंकि यह अमीरी का प्रतीक माना जाता है। खरीदारी त्रयोदशी तिथि के दौरान किसी भी शुभ समय में की जा सकती है।

पूजा विधि और रीति-रिवाज

घर को साफ-सुथरा करके रंगोली सजाई जाती है। द्वार पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाए जाते हैं। शाम को दीपक जलाकर मां लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की पूजा की जाती है। फूल, फल, मिठाई, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। कई जगहों पर 13 दीपक जलाए जाते हैं।