हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश की चपेट में है, जिसके कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भारी बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसने स्थानीय निवासियों के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया है। सोमवार सुबह शहर के भट्टाकुफर में एक पांच मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
भट्टाकुफर में इमारत ढहने का भयावह मंजर
भट्टाकुफर की माठू कॉलोनी में यह विशालकाय इमारत सुबह अचानक भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, क्योंकि प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर रविवार रात को ही भवन को खाली करवा लिया था। स्थानीय लोगों का मानना है कि फोरलेन निर्माण कार्य के कारण इमारत की नींव में बड़ी दरारें आ गई थीं, जिसने इसकी संरचना को कमजोर कर दिया था। इस इमारत के गिरने से आसपास की अन्य इमारतों पर भी खतरा मंडरा रहा है, जिससे लोग अपने घरों को खाली करने पर मजबूर हो रहे हैं। इस खौफनाक घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें इमारत को ढहते हुए साफ देखा जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के भट्टाकुफर माठू कॉलोनी में 5 मंजिला भवन की बहुमंजिला इमारत गिरी
— Priyanka kandpal/प्रियंका काण्डपाल (@pri_kandpal) June 30, 2025
हालांकि इस भवन को पहले ही बीती रात को ही खाली करवा दिया गया था।#HimachalPradesh #HimachalWeather #HimachalNews pic.twitter.com/kaO9PX3yp2
रामपुर में बादल फटने से व्यापक नुकसान
शिमला जिले के रामपुर क्षेत्र में भी सोमवार तड़के करीब 3 बजे बादल फटने से भारी तबाही हुई। रामपुर की सरपारा ग्राम पंचायत के सिक्कासरी नाला गांव में बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भयानक रूप ले लिया। सिक्कासेरी निवासी राजेंद्र कुमार के मकान का एक बड़ा हिस्सा, जिसमें एक कमरा और रसोई शामिल थी, बाढ़ की चपेट में आकर बह गया। उनकी गौशाला में बंधी एक गाय और दो बछिया भी इस भयंकर बाढ़ में बह गईं। राजेंद्र के दो भाइयों, गोपाल और विनोद की गौशालाएं, अनाज के गोदाम और खेत भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। यह घटना पिछले वर्ष इसी इलाके के समेज में हुई बादल फटने की त्रासदी की याद दिलाती है, जिसमें 36 लोगों की जान चली गई थी।
प्राकृतिक आपदाओं का बढ़ता खतरा
शिमला और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगातार हो रही ये प्राकृतिक आपदाएं चिंता का विषय बन गई हैं। भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिसका मुख्य कारण अनियोजित विकास और जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा है। इन घटनाओं ने न केवल जान-माल का नुकसान किया है, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन को भी खतरे में डाल दिया है। प्रशासन और सरकार को इन चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचा जा सके।