E-Attendance Guest teachers in MP: मध्य प्रदेश सरकार ने 1 जुलाई, 2025 से सभी सरकारी स्कूलों में पाठ्यक्रम चलाने वाले अतिथि शिक्षकों यानि गेस्ट फैक्लटी के लिए ई-अटेंडेंस प्रणाली अनिवार्य की है। इसका मकसद शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना और ‘ग़ायब रहने’ जैसी परिस्थतियों को रोकना है। लेकिन अतिथि शिक्षक संघ इस नई व्यवस्था पर असंतोष जाहिर कर रहा है और इसके विरोध में अपना मोर्चा निकालने की तैयारी में है।
अतिथि शिक्षकों के मुख्य विरोध के कारण
ऐसे में अतिथि शिक्षकों का कहना है कि अतिथि शिक्षक नियमित शिक्षकों जैसे ही कर्तव्य जैसे टीचिंग, परीक्षा‑ड्यूटी जैसे फर्ज निभाते है। अब इसी कड़ी में ई‑अटेंडेंस भी जुड़ने जा रहा। ऐसे में वेतन, पदनाम, छुट्टियाँ देने में असमानता क्यों? पिछले 4–5 साल से हर सत्र में “ऑनलाइन अपडेशन” के नाम पर उनसे 500–1000 रुपये प्रति बार खर्च कराए जाते हैं, जबकि सिस्टम अक्सर त्रुटिपूर्ण रहता है। इससे मानसिक व आर्थिक रूप से उन्हें भारी परेशानी होती है। इसके अलावा अतिथि शिक्षक संघ का तर्क है कि जब उनसे नियमित शिक्षकों जैसी जिम्मेदारियाँ ली जा रही हैं, तो उनके साथ ‘बंधुआ मज़दूर’ जैसा अन्याय क्यों किया जा रहा है? वे समान कार्य के लिए समान सुविधा एवं सम्मान चाहते हैं।
नियमित शिक्षक भी उठा रहे अवाज
रेगुलर शिक्षकों ने भी ई‑अटेंडेंस के खिलाफ आवाज उठाई है। उनका मानना है कि यदि पारदर्शिता जरूरी है, तो इसे केवल शिक्षकों तक सीमित न रखते हुए सभी सरकारी कर्मचारियों पर जारी किया जाए। उनसे पूछना चाहिए कि शिक्षा के अलावा भी उनके ऊपर कई गैर‑शैक्षणिक जिम्मेदारियाँ हैं जैसे पंचायत, इलेक्शन ड्यूटी, तो लगातार ई‑अटेंडेंस का अतिरिक्त बोझ क्यों लगाया जाता है?
क्या है अतिथि संघ की माँगे
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि उन्हें ई‑अटेंडेंस के साथ समान वेतनमान, पदनाम, छुट्टियाँ और अधिकार उपलब्ध कराया जाएँ। खर्च के लिए प्रतिवर्ष कम‑से‑कम 500–1000 रुपये की आर्थिक सहायता या मोबाइल प्रदान किया जाए। पोर्टल ठीक से कार्य न करने की स्थिति में शिक्षकों को परेशान न किया जाए, और एप में सुधार हो।