काठमांडू: नेपाल ने इतिहास रच दिया है। देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं सुशीला कार्की अब नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बन गई हैं। बुधवार देर रात काठमांडू स्थित राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें पद की शपथ दिलाई।
Gen-Z की शर्तों के बाद बनी सरकार
कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने का रास्ता आसान नहीं था। लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों और Gen-Z की पांच शर्तों के बाद ही यह फैसला संभव हो पाया। इनमें छह महीने के भीतर आम चुनाव कराना, संसद भंग करना, भ्रष्टाचार की जांच और आंदोलन के दौरान हुई हिंसा पर स्वतंत्र जांच शामिल हैं।
ऐतिहासिक मोड़
कार्की का प्रधानमंत्री बनना सिर्फ राजनीतिक हलचल का नतीजा नहीं, बल्कि नेपाल में महिला नेतृत्व के नए युग की शुरुआत भी है। अब तक नेपाल की राजनीति पुरुष-प्रधान रही है, ऐसे में पहली बार किसी महिला का प्रधानमंत्री पद पर पहुँचना बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
हालांकि Gen-Z ने साफ कर दिया कि वे सरकार का हिस्सा नहीं बनेंगे, बल्कि उसकी निगरानी करने वाली शक्ति के रूप में काम करेंगे। यह भी नेपाल की राजनीति में पहली बार हुआ है कि सरकार गठन सीधे तौर पर युवाओं की शर्तों पर हुआ।
चुनौतियों से भरा कार्यकाल
सुशीला कार्की का कार्यकाल आसान नहीं होगा। उन्हें एक ओर चुनाव की तैयारी करनी है, तो दूसरी ओर हिंसा और अस्थिरता से जूझ रहे देश में शांति बहाल करनी है। साथ ही भ्रष्टाचार की जांच और जनता का विश्वास जीतना भी उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी।