सुप्रीम कोर्ट का वक्फ संशोधन कानून पर बड़ा फैसला, तीन प्रावधानों पर लगाई रोक

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ संशोधन कानून को रद्द करने से इनकार करते हुए उसमें किए गए तीन प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगा दी। अदालत ने साफ कहा कि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति सीमित हो, राज्य बोर्ड का सीईओ मुस्लिम समुदाय से ही हो और संपत्ति की स्थिति तय करने का अधिकार प्रशासनिक अधिकारियों के पास न रहे। यह आदेश उन पांच याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया, जिनमें AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी।

कोर्ट का आदेश: पाँच मुख्य बिंदु मे 

  1. गैर-मुस्लिम सदस्यता पर सीमा – केंद्रीय वक्फ बोर्ड में अधिकतम चार और राज्य बोर्ड में अधिकतम तीन गैर-मुस्लिम सदस्य ही हो सकते हैं। पहले इसकी कोई सीमा तय नहीं थी।
  2. सीईओ की नियुक्ति – राज्य वक्फ बोर्ड का सीईओ, जो पदेन सचिव भी होता है, यथासंभव मुस्लिम समुदाय से ही नियुक्त किया जाए।
  3. वक्फ बनाने की शर्त – उस प्रावधान पर रोक लगाई गई जिसमें वक्फ बनाने के लिए व्यक्ति का पाँच साल से मुसलमान होना अनिवार्य था। अदालत ने कहा कि बिना स्पष्ट नियमों के यह प्रावधान मनमाने ढंग से इस्तेमाल हो सकता है।
  4. वक्फ संपत्ति का सत्यापन – धारा 3C से जुड़े प्रावधान, जो सरकारी अधिकारियों को वक्फ संपत्तियों पर निर्णय का अधिकार देते थे, निलंबित कर दिए गए। कोर्ट ने कहा कि यह “सत्ता के विभाजन” के सिद्धांत के खिलाफ है। संपत्ति का मालिकाना हक केवल वक्फ ट्रिब्यूनल और आगे अपील की प्रक्रिया से तय होगा।
  5. वक्फ का अनिवार्य पंजीकरण – इस प्रावधान में दखल नहीं दिया गया क्योंकि यह पहले से 1995 और 2013 के कानूनों में मौजूद था।

सीजेआई बी.आर. गवई और जस्टिस अगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने मई में लगातार तीन दिन तक सुनवाई की थी और 22 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिकाओं में तर्क दिया गया था कि संशोधन कानून धार्मिक स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकारों का उल्लंघन करता है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि यह कानून पूरी तरह संवैधानिक है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

  • कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, “ऐसे हालात नहीं आने चाहिए थे। जब बिना चर्चा के कानून बनाए जाते हैं, तो अंततः सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ता है। पिछले दस सालों में यह कई बार हुआ है।”
  • भाजपा सांसद और जेपीसी चेयरमैन जगदंबिका पाल ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि संसद से पास हुआ कानून वैध है। यह बिल 14 घंटे की चर्चा और छह महीने की समीक्षा के बाद पारित किया गया था।”

अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी वक्फ संपत्ति के मालिकाना हक पर अंतिम निर्णय वक्फ ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय की अपील प्रक्रिया से ही होगा। फिलहाल कानून की कई धाराओं पर रोक लगने से सरकार को नए दिशा-निर्देश तैयार करने होंगे।