मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के ऊर्जा विभाग (Energy Department) में कार्यरत संविदा कर्मचारियों और अधिकारियों को नियमित करने और अन्य मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। तीन माह पहले सरकार को सौंपे गए प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई न होने से नाराज़ कर्मचारी संगठन 12 अक्टूबर को भोपाल में प्रदर्शन करेंगे।
मध्य प्रदेश यूनाइटेड फोरम फॉर एम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स ने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को यह प्रस्ताव दिया था।
संगठन की प्रमुख मांगें और प्रस्ताव:
संगठन ने सरकार से संविदा नीति 2023 के आधार पर संविदा कर्मचारियों के हित में निम्नलिखित प्रमुख मांगें और सुधार की मांग की है:
| मुख्य मांगें (Core Demands) | अतिरिक्त / विशेष मांगें |
| नियमितीकरण: वितरण कंपनियों के संगठनात्मक स्ट्रक्चर में स्वीकृत नियमित पदों पर कार्यरत अनुभवी संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए। | 50% आरक्षण: बिजली कंपनियों की नई भर्तियों में संविदा कर्मचारियों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए (संविदा नीति 2023 के आधार पर)। |
| ट्रांसफर नीति: तबादला नीति 2025 के अनुरूप बिजली कंपनियों में भी एक तय समय के लिए एक कंपनी से दूसरी कंपनी (गृह जिला) में ट्रांसफर की नीति बनाई जाए। | उच्च वेतनमान और पदोन्नति: नियमित कर्मचारियों के समान संविदा कर्मचारियों को भी 9, 18, और 35 साल की सेवा पूरी करने पर उच्च वेतनमान और पदोन्नति दी जाए। |
| महंगाई भत्ता/इंक्रीमेंट: संविदा नीति 2018 के अनुसार वर्तमान संविदा नीति 2023 में भी महंगाई भत्ता (DA) और इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) का प्रावधान किया जाए। | शैक्षणिक योग्यता: सहायक राजस्व अधिकारी और कार्यालय सहायक जो उच्च शिक्षा पा चुके हैं, उन्हें शैक्षणिक योग्यता के आधार पर समकक्ष पदों पर नियुक्ति या विभागीय परीक्षा के आधार पर तकनीकी पद दिया जाए। |
| वेतन विसंगति सुधार: मध्य क्षेत्र कंपनी में परीक्षण सहायकों को संविदा नीति 2023 के अनुसार स्वीकृत ₹25,300 बेसिक का 90% न देकर गलती से कम बेसिक (₹22,100) दिया गया था। इसे सुधारकर ₹25,300 ग्रेड पे लागू किया जाए। | अन्य कंपनियों में हायर एजुकेशन की अनुमति दी जाए (जैसा कि पूर्व क्षेत्र कंपनी में मिलती है)। राष्ट्रीय अवकाश/उत्सव अवकाश में काम करने पर मानदेय दिया जाए, जिससे सभी कंपनियों में एकरूपता आए। |
आंदोलन की चेतावनी
यूनाइटेड फोरम फॉर पावर एम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स के प्रांतीय अध्यक्ष आरएस कुशवाह ने कहा है कि सरकार को प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि संविदा कर्मचारियों को नियमित पदों पर मर्ज करने की मांग है, क्योंकि ये कर्मचारी अनुभवी हैं और परीक्षा देकर आए हैं।
कुशवाह ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो 12 अक्टूबर को भोपाल में सांकेतिक प्रदर्शन किया जाएगा।