भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता क्रेज: सरकार ला रही नई पॉलिसी, वैश्विक कंपनियों के लिए खुलेंगे द्वार

पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) के बाजार में जबरदस्त उछाल देखा गया है, और भारत भी इस वैश्विक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने को तैयार है। देश में अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को आकर्षित करने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार जल्द ही एक नई नीति के लिए आवेदन आमंत्रित कर सकती है। इस नीति के तहत, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध कंपनियों को कम आयात शुल्क की पेशकश की जाएगी। यह कदम भारत को वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

कम आयात शुल्क और निवेश की शर्तें

इस नई नीति की घोषणा पिछले साल ही की गई थी, जिसमें 35,000 डॉलर तक के आयातित इलेक्ट्रिक वाहनों पर सीमा शुल्क को घटाकर 15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। हालांकि, इस आकर्षक छूट का लाभ उठाने के लिए, इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों को तीन साल के भीतर देश में एक विनिर्माण इकाई स्थापित करने के लिए न्यूनतम 50 करोड़ डॉलर (लगभग 4,175 करोड़ रुपये) का निवेश करना अनिवार्य होगा। ब्लूमबर्ग न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि इन आवेदनों को इसी महीने खोला जा सकता है।

टेस्ला और विंफ़ास्ट जैसी कंपनियों की भारत में एंट्री

बिलिनेयर एलोन मस्क की टेस्ला जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियां भारत में अपना व्यवसाय शुरू करने की तैयारी में हैं। हालांकि, मस्क पहले ही देश में आयातित वाहनों पर लगने वाले उच्च शुल्क पर अपनी आपत्ति व्यक्त कर चुके हैं। इन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के भारतीय बाजार में प्रवेश से घरेलू ऑटोमोबाइल कंपनियों, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली टाटा मोटर्स के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है।

सख्त वित्तीय पात्रता और वियतनाम की विनफ़ास्ट का प्रवेश

इस नई नीति का लाभ उठाने वाली कंपनियों के लिए कुछ सख्त वित्तीय पात्रता मानदंड भी तय किए गए हैं। इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता को अपने व्यवसाय के चौथे वर्ष में न्यूनतम 50 अरब रुपये (लगभग 500 करोड़ रुपये) का राजस्व अर्जित करना होगा। यदि कोई कंपनी इस शर्त को पूरा नहीं कर पाती है, तो उसे राजस्व में कमी के तीन प्रतिशत तक का जुर्माना चुकाना होगा।

इसी बीच, वियतनाम की इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता विनफ़ास्ट (VinFast) ने भी भारतीय बाजार में अपनी VF6 और VF7 इलेक्ट्रिक SUV को लॉन्च करने की पुष्टि की है। इन दोनों एसयूवी का डिजाइन और विकास वियतनाम में किया गया है, और इनमें भारतीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। विनफ़ास्ट ने घोषणा की है कि VF6 और VF7 के लिए बुकिंग जून में शुरू हो जाएगी। कंपनी की तमिलनाडु में निर्माणाधीन फैक्ट्री अगले कुछ हफ्तों में चालू होने की उम्मीद है, जिसकी शुरुआती वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 50,000 यूनिट होगी। इस साल की शुरुआत में आयोजित भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो में कंपनी ने अपने इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रदर्शन भी किया था। कंपनी अब उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बजाय एशियाई देशों में अपनी बिक्री बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यह भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के लिए एक रोमांचक समय है, जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दोनों ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।