शताब्दियों के संघर्ष के बाद अपने पुरातन वैभव को प्राप्त करने की ओर अग्रसर रामनगरी अयोध्या में आज गंगा दशहरा के पावन अवसर पर एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गुरुवार को राम मंदिर परिसर में बने पूरक मंदिरों और विशेष रूप से राजाराम यानी राम दरबार की भव्य प्राण प्रतिष्ठा की. यह विशेष कार्यक्रम सुबह 11:25 बजे से 11:40 बजे तक चला, जो गंगा दशहरा के सिद्ध योग में संपन्न हुआ. इसी शुभ तिथि पर रामेश्वरम की भी प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ गया है.
प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान सुबह छह बजे ब्रह्ममुहूर्त से ही शुरू हो गया था, जिसके दौरान मंदिर प्रांगण में चारों ओर उल्लास और भक्ति का वातावरण छाया रहा. सभी देवताओं का पूजन यज्ञमंडप में विधिवत तरीके से किया गया.
श्री अयोध्या धाम में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्री राम दरबार एवं देव विग्रहों के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में… https://t.co/27AnsR1JC3
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 5, 2025
राम दरबार की विग्रहों की भव्यता और माप
राम दरबार में स्थापित होने वाली मूर्तियों की भव्यता देखते ही बनती है. सिंहासन सहित राम दरबार की मुख्य मूर्ति की कुल ऊंचाई सात फीट है. इसमें सिंहासन की ऊंचाई लगभग साढ़े तीन फुट है, जबकि भगवान श्रीराम और माता सीता के विग्रह की ऊंचाई साढ़े चार फुट है. मूर्ति को सिंहासन पर स्थापित करने के बाद इसकी ऊंचाई थोड़ी कम हो गई, जिससे कुल ऊंचाई लगभग सात फीट तक पहुंच गई.
वहीं, राम दरबार में विराजमान अन्य विग्रहों की बात करें तो, हनुमान और भरत की मूर्तियां बैठी मुद्रा में हैं और इनकी ऊंचाई ढाई फीट है. जबकि, लक्ष्मण और शत्रुघ्न की मूर्तियां खड़ी मुद्रा में हैं, जिनकी ऊंचाई तीन-तीन फीट है. इन सभी विग्रहों का संयोजन राम दरबार को अत्यंत भव्य और दिव्य रूप प्रदान करता है.
बालकराम के बाद राजाराम की प्राण प्रतिष्ठा: एक ऐतिहासिक क्षण
रामलला (बालकराम) की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब अयोध्या ने राजाराम (राम दरबार) की प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक क्षण भी देखा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं भव्य मंदिर में सभी विग्रहों का अभिषेक किया और इसके बाद राम दरबार की मुख्य मूर्ति से आवरण हटाया. इस दौरान राजाराम का आभूषणों से भव्य श्रृंगार किया गया, जिसने पूरे वातावरण को और भी अलौकिक बना दिया.
इस महत्वपूर्ण अवसर पर अयोध्या के 19 संत धर्माचार्य भी उपस्थित रहे, जिन्होंने अनुष्ठान को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की. इसके अतिरिक्त, राम मंदिर ट्रस्ट, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पदाधिकारी भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने. यह प्राण प्रतिष्ठा समारोह अयोध्या के आध्यात्मिक पुनरुत्थान में एक और मील का पत्थर साबित हुआ है.