राजधानी भोपाल में सरकारी लापरवाही से अंतरराष्टÑीय स्तर के चार हेल्थ प्रोजेक्ट अटक गए हैं। जबकि इनकी शहरवासियों को अत्यधिक जरूरत है। इन अंतरराष्टÑीय संस्थान के निर्माण के बाद ब्रेन ट्यूमर, ब्रेन व लंग्स कैंसर, स्पोर्ट्स एंजुरी जैसे घातक रोगों का इलाज शहर में हो सकेगा। अभी इनका इलाज कराने के लिए शहरवासियों को मुंबई, दिल्ली सहित अन्य शहरों का रुख करना पड़ रहा है। जिससे मरीजों के साथ परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।
इन घातक बीमारियों के समुचित इलाज के लिए राजधानी में दर्जन भर अंतराष्ट्रीय संस्थान तैयार किए जा रहे हैं। इनका कार्य भी शुरू हो चुका है। लेकिन लेटलतीफी के चलते यह अब तक अधूरे पड़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संस्थान बनकर तैयार हो जाएं तो शहर में अंतरर्राष्टÑीय स्तर की जांच सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी। साथ ही भोपाल बेहतरीन हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी प्रसिद्ध होगा। आइए जानते हैं कौन-कौन से प्रोजेक्ट राजधानी में सरकारी अधिकारियों के लापरवाही के चलते अटके पड़े हैं।
अधूरी कागजी कार्रवाई के चलते स्पोर्ट्स इंजुरी इंस्टीट्यूट में देरी
स्पोर्ट्स इंजुरी सेंटर अधूरी कागजी कार्रवाई के चलते अटक गया है। 2018 में गांधी मेडिकल कॉलेज में स्पोर्ट्स इंजुरी सेंटर और सेंटर आॅफ एक्सीलेंस इन आॅर्थोपेडिक्स का निर्माण करने का प्रस्ताव तैयार किया गया। स्पोर्ट्स इंजुरी सेंटर का निर्माण 46 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। इस संस्था को आरआईआरडी के साथ ही तैयार किया जाना है। स्पोर्ट्स इंजुरी सेंटर में उन्नत आॅर्थोपेडिक ट्रीटमेंट की सुविधा राजधानीवासियों को मिलेगी। इससे कूल्हा बदलना, घुटना बदलना, हड्डी की जटिल सर्जरी, रीढ़ की हड्डी सर्जरी, सुविधाएं मिलेगी।
एनससीडीसी के लिए 100 करोड़ रुपए लागत
एनससीडीसी दिल्ली या नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ वायरोलॉजी, पुणे सैंपल भेजे जाते हैं। गंभीर बीमारियों की जांच के लिए एनसीडीसी ने तीन साल पहले मध्य प्रदेश में बायोसेफ्टी लेवल-3 लैब बनाने की मंजूरी दी थी। यह लैब 100 करोड़ रुपए में बनकर तैयार होनी थी।
फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की जांच अटकी
क्षेत्रीय श्वसन रोग संस्थान आरआईआरडी के निर्माण में देरी के चलते फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों की जांच भी अटक गई है। आरआईआरडी का निर्माण 55 करोड़ रुपए की लागत से किया जाना था। लेकिन अब भी यह संस्थान अधूरा है।
लंग्स ट्रांसप्लांट की मिलेगी सुविधा
राजधानीवासियों को रेस्पीरेटरी इंस्टीट्यूट के माध्यम से फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों जैसे फाइब्रोसिस और लंग्स कैंसर व लंग्स ट्रांसप्लांट की सुविधा मिल सकेगी। यह सेंटर प्रेदश में अपनी तरह का पहला होगा।