वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 52-क जो कोई ऐसी संपत्ति का जो वक्फ संपत्ति है, बोर्ड की पूर्व मंजूरी के बिना, किसी प्रकार की किसी रीति में, चाहे स्थाई रूप से या अस्थाई रूप से अन्य सक्रमण करता है या क्रय करता है या कब्जा लेता है, ऐसा करने पर उस व्यक्ति पर दो वर्ष की सजा या कठौर कारावास से दण्डनीय होना पडेंगा। यह अधिनियम की धरा सुनकर ऐसा प्रतीत होता हें कि कानून के रक्षक निष्पक्ष और इमानदारी ेस अपने कार्य को अंजाम दे रहें हैं। लेकिन धरातल पर जाकर देखे तो कानून की धज्जियां ऊड़ाने में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका शीर्ष पदों के साथ संवेधानिक पदों पर बैठे लोंगों द्वारा ऊड़ाई जातीे हैं। ऐसा आरोप किसान नेता मुकेश रिछारिया और साबिर मियां ने लगाएं हैं।
अध्यक्ष राष्ट्रीय किसान संगठन मुकेश रिछारिया द्वारा कलेक्टर सहित प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को मांग पत्र देकर वक्फ संपत्तियों की जांच कराने की मांग की थी। लेकिन आज तक उसका निराकरण नही हो पाया हैं जबकि प्रदेश के सभी कार्योलयों को छोड़ कर मात्र एक विभाग स्पेशल टास्क फोर्स ने कलेक्टर को पत्र लिखकर करवाई कराने की बात कही हैं। इधर मुकेश रिछारिया का आरोप हैं कि जिले से लेकर प्रदेश में अधिकांश अधिकारी कार्य नही करते हें मात्र सिर्फ रस्म अदायगी के रूप में कार्यो को अंजाम देते रहते हैं। उन्होंनें कहा कि शिकायती आवेदन में 6 लोगों के नाम लिखकर शिकायत की थी लेकिन मात्र तीन नाम को जांच में लिया गया हैं आखिर क्या कारण हैं। जिन लोगों को कारवाई के लिए पत्र आया हैं उनमें अप्यूब कुरैशी, अध्यक्ष, वक्फ कमेटी विदिशा, कलीम उल्लाह, वक्फ कर्मचारी के विरुद्ध करबा कुरवाई, विदिशा की ज्यारत शरीफ की भूमी सर्वे शमांक 1006, रकबा 2.341 हेक्टेयर को अनावेदक विनोद हलमा, हल्का पटवारी कस्बा कुरवाई के साथ सांठगांठ कर भुमाफिया जावेद मंसूरी को विक्रय करने संबंधी आवेदन पत्र प्रेषित किया गया है। उक्त पत्र की जांच कराई जाएं।
कलेक्टर से मिला आश्वासन
गजट में वक्फ वोर्ड के नाम जमीन दर्ज हैं। लेकिन रजिस्ट्री और नामांतरण किया गया हैं यह किस के मार्गदर्शन में किया गया और किस अधिनियम की धारा के साथ नामांतरण हुआ हैं ऐसे लोगो पर क्या कारवाई का प्रावधान हैं। कलेक्टर ने हालांकि शिकायत कर्त्ता को कारवाई का आश्वयन दिया हैं। कि जो भी दोषी होगा निष्प्क्ष जांच कराकर कारवाई की जाएंगी। शिकायतकत्ताओं का आरोप हैं कि प्रशासन की मिली भगत से फर्जी रजिस्ट्री और नामांतरण कराने का खेल चल रहा हैं जिन्हें कारवाई करना हैं वह स्वये इस गौरखधंधें में लिप्त हैं। ऐसे में कारवाई की उम्मीद करना वैमानी साबित होगा। कई ऐसी संपत्तियां जिन पर नजरें हैं।
इसके अलावा कई संपत्ति हैं जिस पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर रखा हैं
यह हैं आरोप: मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड भोपाल द्वारा पत्र जारी कर कलेक्टर से निवेदन किया गया हैं जिसमें बताया हें कि चक्क जियास्त शरीफ मय मदरसा घुंघरू शाह बाबा कृषि भूमि, मकानात एवं दुकानात कस्बा कुरवाई जिला विदिशा की भूमि का अनाधिकृत रूप से की गई रजिस्ट्री एंव अवैध नामांतरण निरस्त करने एवं आगामी होने वाली रजिस्ट्री पर रोक लगाने के मांग की हैं। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार वक्फ जियारत शरीफ मय मदरसा घुंघरू शाह बाबा कृषि भूमि, मकानात एवं दुकानात कस्बा कुरवाई जिला विदिशा की भूमि खसरा / सर्व क. 1006/1 रकबा 0.627 में से 3 बीघा भूमि का अनाधिकृत रूप से जावेद मंसूरी निवासी सिरोज द्वारा राजेश साहू पिता छोटेलाल साहू बने विक्रय की गई है। जिसका 23 जुलाई 2024 तहसीलदार न्यायालय से नामांतरण किया गया एवं 30 जुलाई 2024 को अनुविभागीय अधिकारी कुरवाई न्यायालय से आवासीय डायवर्सन भी करा लिया गया है। जिसको लेकर किसान नेता मुकेश रिछारिया और साबिर मियां ने बताया कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिएं। जब वक्फ के गजट में वक्फ की जमीन हैं तो एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी ने गलत रिर्पोट क्यों लगाई। मतलब गलत लोगों का साथ दिया हैं। इन लोगो पर कारवाई होनी चाहिएं। दूसरा मेरे द्वारा 6 लोगो की शिकायत की गई थी मात्र 3 लोगोे को जांच के घेरे में लिया हैं। बाकि ऐसी क्या नोबत आ गई तीन लोगों को छोड़ क्यों दिया। इन सबकी निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक अधिकारी जो भी दोषी हैं उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।