22 साल बाद लौटा बेटा, वापस देखकर माता-पिता की आँखें नम

22 साल

Return Of Son After 22 Years: मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील के ग्राम पंचायत जैतूपुर में करिश्मा देखने को मिला, जब 22 साल पहले खोया एक बेटा अचानक अपने घर लौट आया। रामकेश पाल नामक यह युवक 15 साल की उम्र में बस अड्डे से लापता हुआ था। उसका इतने वर्षों बाद यूं लौट आना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा। बेटे को देखकर बूढ़े मां-बाप की आंखों से खुशी के आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।। जैसे ही युवक अपने गांव की सीमा में पहुंचा, लोग ‘राम-राम’ के जयकारे लगाने लगे और ढोल-नगाड़ों की गूंज से गांव का माहौल पूरी तरह बदल गया। गांव वालों ने फूल-मालाओं से उसका भव्य स्वागत किया। बूढ़ी मां की आंखों में बेटे को देखकर खुशी के आंसू छलक आए।

बस अड्डे से गायब हुआ था 15 साल का बेटा

घटना 22 साल पुरानी है। वर्ष 2003 में रामकेश पाल पिता राम आसरे पाल अपनी चाचा की बेटी की विदाई करवाने उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के ग्राम चंदौली गया था। वापस लौटते समय करतल (उप्र) के बस अड्डे से वह अचानक गायब हो गया। परिजन उसकी तलाश में दर-दर भटके। पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई, मंदिर-मस्जिद में मन्नतें मांगीं, तांत्रिकों और ज्योतिषियों से भी मदद ली, मगर कोई सुराग नहीं मिला।

बंधक बना लिया गया था

लापता होने के बाद रामकेश को कुछ लोगों ने बहला-फुसलाकर अपने कब्जे में ले लिया। उसे झांसी के ग्राम पालर ले जाया गया। वहीं उसे खेती-किसानी के काम में लगा दिया गया। धीरे-धीरे वह अपने गांव और परिवार को लगभग भूल चुका था। उसने परिवार से मिलने की उम्मीद भी छोड़ दी थी।

गलत आधार कार्ड बनवाया

बंधक बनाए रखने वालों ने रामकेश की पहचान बदलने के लिए उसका नाम बदलकर “करण पाल पिता रामपाल पाल” के नाम से आधार कार्ड बनवा दिया था, जिससे किसी को शक न हो।

सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका

हाल ही में एक सामाजिक कार्यकर्ता को उसके हालात का पता चला। कार्यकर्ता ने गुप्त तरीके से रामकेश से संपर्क किया और उसके असली नाम और गांव की जानकारी जुटाई। जानकारी के आधार पर ग्राम पंचायत जैतूपुर के सरपंच अरविंद पटेल से संपर्क किया गया। सरपंच ने गांव के बुजुर्गों से पुष्टि करवाई और अजयगढ़ थाने में सूचना दी।

पुलिस और प्रशासन का सहयोग

पन्ना पुलिस ने तत्काल झांसी पुलिस से संपर्क किया। फिर 28 जून 2025 को रामकेश के पिता, भाई, चाचा और अन्य परिजन झांसी पहुंचे। पुलिस व सामाजिक कार्यकर्ता के सहयोग से आखिरकार 22 साल बाद खोए हुए बेटे को परिवार से मिला दिया गया।

गांव में हुआ भव्य स्वागत

जैसे ही रामकेश अपने गांव पहुंचा, पूरा जैतूपुर गांव खुशी से उमड़ पड़ा। ढोल-नगाड़े, आतिशबाजी, फूल-मालाएं और कलश के साथ उसका स्वागत हुआ। मां ने बेटे को गले से लगाकर फूट-फूटकर रोना शुरू कर दिया। भाई-बहन भी खुशी से झूम उठे। रामकेश भी अपने आंसू नहीं रोक पाया।

परिवार ने जताया आभार

रामकेश तीन भाइयों में सबसे बड़ा है। उसकी दो बड़ी और दो छोटी बहनें हैं। 22 साल बाद अपने बेटे को पाकर पिता राम आसरे पाल और पूरा परिवार भावुक हो उठा। परिवार ने सरपंच अरविंद पटेल, पुलिस प्रशासन और सामाजिक कार्यकर्ता का आभार जताया। गांव में देर रात तक दीप जलाए गए और मिठाइयां बांटी गईं।