Question on electricity system in Madhya Pradesh: कंपनी के दावों के बावजूद प्रदेश भर में बिजली गुल की समस्या बनी हुई है। आंधी-बारिश के शुरुआती दौर में ही व्यवस्था चरमरा गई है। राजधानी भोपाल के कई इलाकों में हर दिन 7-7 घंटों की अघोषित कटौती की जा रही है। वहीं कई जगह तो कई जगह तो रात 2 बजे के बाद सप्लाई बंद होने की शिकायतें मिली हैं। भोपाल के 203 इलाकों के 2.5 लाख लोग बीते एक सप्ताह से बार-बार बिजली गुल होने की समस्या से परेशान है। बिजली एक-दो घंटे नहीं, बल्कि सुबह से रात तक बार-बार आ-जा रही है।
बिजली कंपनी द्वारा बनाए गए कॉल सेंटर शिकायतें दूर करने में नाकाम हो रहे हैं। शिकायतों के लिए ऊर्जा मंत्री ने कॉल सेंटर तो बनाया लेकिन उनका निपटारा कैसे होगा इसकी कोई निगरानी व्यवस्था नहीं हो पाई है। शहर के पंजाबी, बाग, नर्मदापुरम रोड, खानूगांव, चांदबड़, नीलबड़, रातीबड़, ईदगाह हिल्स, अवधपुरी, गोपाल नगर, सिद्धार्थ लेक सिटी, सुविधा विहार, पटेल नगर, आनंद नगर, गोविंद गार्डन, लालघाटी, संजीव नगर, कोहेफिजा, संत हिरदाराम नगर के लोग बिजली गुल होने की समस्या से परेशान हैं। इसके अलावा शहर के अन्य इलाकों में भी यह समस्या लगातार बनी हुई है। जनता की परेशानी पर जिम्मेदार इस बारे में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
ढाई माह में 1.3 करोड़ खर्च
अप्रैल से अब तक ढाई माह में मेंटेंनेस के नाम पर 1.3 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। दावा किया गया था कि प्री-मानसून मेंटेनेंस से सिस्टम मजबूत होगा। लेकिन, जरा सी आंधी-बारिश में कई इलाकों में घंटों बिजली गायब होने से पूरे सिस्टम की पोल खुल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार शहर के 26 जोन में हर एक पर औसतन 5 लाख रुपए खर्च किए गए। इसके बाद भी फाल्ट पकड़ने और सुधारने में घंटों लग रहे हैं।
जून में ट्रिपिंग 20 फीसदी कम
जून में अब तक पिछले साल की तुलना में 20 फीसदी ट्रिपिंग कम रही है। इस साल मार्च, अप्रैल में भी ट्रिपिंग कम रही है। वहीं मई में पिछले साल की तुलना में ट्रिपिंग अधिक रही। बारिश के दिनों में कई कारणों से बिजली गुल होने के मामले बढ़ जाते हैं। बारिश और आंधी-तूफान के चलते टहनियां टूटकर बिजली के तारों में गिर जाती हैं जिसके चलते फाल्ट के मामले बढ़ जाते हैं।