Shivpuri Medical College Scam: मध्य प्रदेश के शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से घोटाले की खबर सामने आई है। कॉलेज के डीन और दो अन्य लोगों पर आयुष्मान कार्ड के इंसेंटिव पैसे को अपने बैंक खाते में डालने का आरोप है। मामले में कॉलेज के डीन डॉ. धर्मदास परमहंस, अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष चौऋषि और एक डायरेक्टर शिल्पा गुप्ता के खिलाफ लोकायुक्त कार्यालय भोपाल में भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कर ली गई है।
शिकायतकर्ता और मामला दर्ज होने की प्रक्रिया
इस गंभीर आरोप की शिकायत रिटायर्ड नगर पालिका के सीएमओ रामनिवास शर्मा ने की थी। शर्मा ने आरोप लगाया कि इन तीनों अधिकारियों ने आयुष्मान योजना के अंतर्गत जारी की गई राशि का दुरुपयोग करते हुए ₹77,556 की रकम अपने-अपने पर्सनल बैंक खातों में ट्रांसफर कर ली, जबकि इस योजना में उनके लिए कोई प्रोत्साहन राशि निर्धारित नहीं थी।
शिकायत में यह भी बताया किया गया कि आयुष्मान योजना की राशि का वितरण नियमों के मुताबिक होना चाहिए। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने 15 फरवरी 2024 को स्पष्ट आदेश जारी किया था कि डीन, अधीक्षक और डायरेक्टर इस योजना के नोडल अधिकारी नहीं हैं तो इसके आधार पर प्रोत्साहन राशि पर उनका अधिकार नहीं।
आरोपों की पुष्टि और मामला दर्ज
शिकायत मिलने के बाद भोपाल लोकायुक्त कार्यालय ने गंभीरता से मामले की जांच की। लोकायुक्त के विधि सलाहकार जसवंत सिंह यादव ने 2 जून 2025 को इस पर आधिकारिक रूप से ये पूरा मामला दर्ज किया। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और संबंधित दस्तावेजों की छानबीन की जा रही है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह एक बड़ा प्रशासनिक और नैतिक अपराध माना जाएगा।
डीन का बचाव और सफाई
विवाद के बाद शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. धर्मदास परमहंस ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि “राशि का ट्रांसफर शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में पूर्व से चली आ रही परंपरा के अनुसार किया गया था। जैसे ही यह जानकारी मिली कि यह राशि नियमों के विरुद्ध ट्रांसफर हुई है, तुरंत ही पूरी रकम को नोडल अधिकारी के खाते में लौटा दिया गया।”
डीन ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कोई भी नियम नहीं तोड़ा और पूरा लेनदेन प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हुआ। उन्होंने यह भी अपील की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और बिना तथ्य के किसी की छवि को धूमिल न किया जाए।
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता और जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आयुष्मान भारत जैसी महत्त्वाकांक्षी योजना में इस तरह की लापरवाही या गड़बड़ी से न केवल योजना प्रभावित होती है, बल्कि जरूरतमंद मरीजों को भी नुकसान पहुंचता है। सरकार और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों में समय पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।