मध्यप्रदेश में 40 हजार बैंककर्मी हड़ताल पर, केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ ‘भारत बंद’ का असर

Bharat Bandh: आज केंद्र सरकार की कथित श्रम-विरोधी नीतियों और आर्थिक सुधारों के विरोध में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए ‘भारत बंद’ का देशभर में आंशिक असर देखने को मिला। इस बंद के चलते कई राज्यों में जनजीवन और आवश्यक सेवाएं प्रभावित हुईं।

मध्यप्रदेश में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित

मध्यप्रदेश में करीब 40 हजार बैंककर्मी बुधवार को हड़ताल पर रहे, जिससे प्रदेश की लगभग साढ़े 8 हजार बैंक शाखाओं में कामकाज ठप हो गया। ये बैंककर्मी अपनी 17 सूत्रीय मांगों के समर्थन में हड़ताल कर रहे हैं। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन और बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया ने केंद्रीय श्रमिक संगठनों की मांगों का समर्थन करते हुए इस अखिल भारतीय बैंक हड़ताल का आह्वान किया था। यह हड़ताल केंद्र सरकार की जन एवं श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ और बैंकिंग व वित्तीय संस्थानों से संबंधित विशिष्ट मांगों को लेकर की गई।

देश के अन्य हिस्सों में बंद का असर

‘भारत बंद’ का असर देश के विभिन्न हिस्सों में भी देखा गया। पश्चिम बंगाल के मिदनापुर सेंट्रल बस स्टैंड पर वाहनों की आवाजाही रोकने की कोशिश कर रहे वामपंथी ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। झारखंड में, अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने रांची स्थित सीएमपीडीआई मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। केरल में, कोच्चि की सड़कें खाली रहीं, जबकि कोट्टायम में दुकानें और शॉपिंग मॉल बंद देखे गए। हरियाणा में भी, 40 से अधिक सरकारी विभागों के कर्मचारियों के अलावा, 55 बोर्ड और निगमों के अधिकांश कर्मचारी और संगठनों के पदाधिकारी हड़ताल में शामिल रहे।

पंजाब में परिवहन व्यवस्था पर गहरा असर

पंजाब में भी हड़ताल का व्यापक असर दिखा, जहाँ पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी अनुबंध कर्मचारी यूनियन ने 11 जुलाई तक हड़ताल शुरू कर दी है। इसके चलते 3,000 से ज्यादा सरकारी बसें सड़कों से नदारद रहीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड और राजस्थान जाने वाले यात्रियों पर पड़ा है। हालांकि, कुछ बसें स्थायी ड्राइवरों द्वारा चलाई जा रही थीं, लेकिन प्रत्येक डिपो से बहुत कम बसें ही सड़कों पर आ पाईं, जिससे लंबी दूरी की यात्राएं बाधित हुईं।

यह राष्ट्रव्यापी बंद सरकार पर अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने का दबाव बनाने के लिए बुलाया गया था, जिसका असर आज देश के कई हिस्सों में महसूस किया गया।