Jaishankar in China:- पांच साल के लंबे अंतराल के बाद भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन का दौरा किया है। गलवान घाटी में 2020 के सैन्य टकराव के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में जो ठहराव आया था, उसे दूर करने की दिशा में इस दौरे को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सोमवार को बीजिंग पहुंचते ही जयशंकर ने चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की और दोनों देशों के संबंधों में सुधार की उम्मीद जताई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह दौरा द्विपक्षीय रिश्तों को एक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाएगा।
शीर्ष नेताओं की मुलाकात से मिली रिश्तों को नई रफ्तार
अपनी बीजिंग यात्रा के शुरुआती चरण में ही जयशंकर ने चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग के साथ खुलकर बातचीत की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने हाल ही में कज़ान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत का जिक्र किया, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में आई नई गति का आधार माना जा रहा है। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि हान झेंग से मिलकर खुशी हुई और उन्होंने चीन की शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की अध्यक्षता के लिए भारत के समर्थन की बात दोहराई। उन्होंने लिखा, “हमारे रिश्ते लगातार बेहतर हो रहे हैं और मुझे विश्वास है कि इस दौरे से इन रिश्तों को और बल मिलेगा।”
Pleased to meet Vice President Han Zheng soon after my arrival in Beijing today.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) July 14, 2025
Conveyed India’s support for China’s SCO Presidency.
Noted the improvement in our bilateral ties. And expressed confidence that discussions during my visit will maintain that positive trajectory. pic.twitter.com/F8hXRHVyOE
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। विशेष रूप से, 2024 के अंत में कज़ान में मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद सीमा विवाद को सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधि (एसआर) प्रणाली को फिर से शुरू करने का फैसला लिया गया था, जिससे कूटनीतिक बातचीत के रास्ते फिर से खुल गए हैं।
तनाव और उम्मीदों के बीच कूटनीति का संतुलन
पिछले कुछ सालों में भारत और चीन के बीच कई मुद्दे तनाव का कारण रहे हैं। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत और चीन को भी हुए भारी नुकसान ने दोनों देशों के रिश्तों को दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था। इसके अलावा, पाकिस्तान को चीन के निरंतर सैन्य समर्थन और हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले जैसे घटनाक्रम भारत के लिए चिंता का विषय बने रहे हैं।
इसके बावजूद, जयशंकर ने द्विपक्षीय रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में सकारात्मकता दिखाई। उन्होंने 75 साल के कूटनीतिक संबंधों का उल्लेख किया और कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने के चीन के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि रिश्तों का सामान्य होना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है, खासकर तब जब आज का वैश्विक माहौल बेहद जटिल है। उनके अनुसार, पड़ोसी मुल्कों और दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन के बीच खुली और नियमित बातचीत बहुत जरूरी है।
आने वाले दिनों में अहम बैठकें और भविष्य की राह
उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात के बाद जयशंकर अपने चीनी समकक्ष वांग यी से भी मुलाकात करेंगे। दोनों नेता पिछली बार फरवरी में जोहान्सबर्ग में जी20 की बैठक के दौरान मिले थे। इस दौरे के दौरान जयशंकर तियानजिन में होने वाली एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। यह बैठक उन्हें चीन सहित अन्य सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय बातचीत करने का अवसर प्रदान करेगी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा गलवान के बाद रिश्तों में आई कड़वाहट को कम करने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है। इस दौरे के बाद, अगले महीने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के भारत आने की भी उम्मीद है, जहां वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात कर सकते हैं। यह सब मिलकर दर्शाता है कि दोनों देश सीमा विवाद के बावजूद कूटनीतिक संवाद के माध्यम से अपने संबंधों को पटरी पर लाने के लिए उत्सुक हैं।