India fired 3 missiles in 48 hours: भारत की रक्षा क्षमताएँ निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रही हैं, जिसका स्पष्ट प्रमाण हाल ही में 16 और 17 जुलाई 2025 को हुए तीन महत्वपूर्ण मिसाइल परीक्षण हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों की ताकत साबित होने के बाद, इन सफल परीक्षणों ने भारत की सामरिक और तकनीकी कौशल को विश्व मंच पर फिर से स्थापित कर दिया है। ये परीक्षण न केवल देश की आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं, बल्कि इसकी सीमाओं की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करते हैं।
लद्दाख में आकाश-प्राइम की गर्जना: ऊंचाई पर विजय
16 जुलाई को भारतीय सेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब उन्होंने लद्दाख के दुर्गम और अत्यधिक ऊँचे इलाकों में आकाश-प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण 4,500 मीटर (लगभग 15,000 फीट) से अधिक की ऊंचाई पर किया गया, जहाँ ऑक्सीजन की कमी और तेज़ हवाएँ जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ थीं। यह आकाश मिसाइल प्रणाली का एक उन्नत संस्करण है, जिसे विशेष रूप से भारतीय सेना की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया गया है। यह मिसाइल 30-35 किलोमीटर तक के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है और 18-20 किलोमीटर की ऊंचाई तक प्रभावी ढंग से काम कर सकती है। इसकी क्षमता लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन जैसे हवाई खतरों से निपटने की है। ‘राजेंद्र’ रडार से लैस यह प्रणाली 360 डिग्री कवरेज प्रदान करती है और एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक करने की क्षमता रखती है। इस परीक्षण में आकाश-प्राइम ने दो हाई-स्पीड ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया, जो इसकी असाधारण सटीकता का प्रमाण है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वदेशी रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर (RF Seeker) है, जो लक्ष्य की सटीक पहचान और मिसाइल को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह तकनीक पहले केवल कुछ ही देशों के पास उपलब्ध थी, जिससे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बल मिला है। यह ‘फर्स्ट ऑफ प्रोडक्शन मॉडल फायरिंग ट्रायल’ का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य सेना को जल्द से जल्द मिसाइलों की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। भारतीय सेना, DRDO, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और कई निजी कंपनियों ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अब इस मिसाइल को सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा।
ओडिशा में पृथ्वी-2 और अग्नि-1: परमाणु शक्ति का आधार
लद्दाख में आकाश-प्राइम की सफलता के ठीक एक दिन बाद, 17 जुलाई को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से दो और महत्वपूर्ण मिसाइलों, पृथ्वी-2 और अग्नि-1 का सफल परीक्षण किया गया। ये दोनों ही कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जो भारत की परमाणु निवारक क्षमता को और मजबूत करती हैं। पृथ्वी-2 एक तरल-ईंधन आधारित मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 350 किलोमीटर तक है, जबकि अग्नि-1 ठोस-ईंधन पर संचालित होती है और 700 किलोमीटर की रेंज रखती है। ये दोनों मिसाइलें परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के वारहेड ले जाने में सक्षम हैं। इन परीक्षणों का संचालन सामरिक बल कमान (Strategic Forces Command) की देखरेख में किया गया और सभी तकनीकी मापदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इन परीक्षणों ने भारत की विश्वसनीय न्यूनतम निवारक क्षमता को और अधिक विश्वसनीय बनाया है।
ऑपरेशन सिंदूर की प्रेरणा और आगे का मार्ग
आकाश-प्राइम की यह नवीनतम सफलता ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आई है, जिसमें भारत ने पाकिस्तान के हवाई हमलों को प्रभावी ढंग से विफल किया था। उस समय, आकाश मिसाइल प्रणाली ने चीनी ड्रोन और तुर्की के विमानों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अनुभवों से सीख लेते हुए, आकाश-प्राइम को सेना की सलाह के अनुसार बेहतर बनाया गया है, विशेष रूप से ऊँचाई वाले इलाकों में इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
इन तीनों मिसाइलों के सफल परीक्षणों ने भारत की रक्षा शक्ति को एक नई पहचान दी है। लद्दाख में आकाश-प्राइम और ओडिशा में पृथ्वी-2 व अग्नि-1 का प्रदर्शन भारत की परमाणु और हवाई रक्षा में आत्मनिर्भरता का एक स्पष्ट प्रमाण है। ये उपलब्धियाँ न केवल भारत की सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करती हैं, बल्कि इसे वैश्विक रक्षा परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में भी स्थापित करती हैं।