विधानसभा का मानसून सत्र नजदीक निगम का बिल्डिंग परमीशन सेल खाली

राजधानी में अब मप्र विधानसभा का मानसून सत्र नजदीक है लेकिन दूसरी तरफ नगर निगम का बिल्डिंग परमीशन सेल खाली पड़ा है। इसके कारण राजधानी में बिल्डिंग परमीशन और अवैध कालोनियों से जुड़े विधायकों के सवालों की तैयारी करने में निगम के अधिकारियों को पसीना आ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस समय बिल्डिंग परमीशन सेल के चीफ सिटी प्लानर अनूप गोयल अवकाश पर हैं और दूसरी तरफ यहां से इंजीनियरों के तबादले होने के बाद अभी तक नये इंजीनियरों की पोस्टिंग नहीं हो पायी है। सेल में काम कर रहे सहायक इंजीनियर मयंक शर्मा को जरूर इस समय सेल की फाइलों को डील करने का काम सौंपा गया है।

इसके चलते अब पूरा शहर उनके हवाले कर दिया गया है लेकिन इसका भी सेल के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने विरोध किया है। यहां पर तीन सौ फाइलें पहले से ही अटकी हुई हैं। इसके अलावा यहां पर शहर में बिना परमीशन होने वाले निर्माणों की जांच का काम भी अधर में चल रहा है। भोपाल में टीएंडसीपी की आपत्ति के कारण डेढ़ महीने से प्राइवेट आर्किटेक्ट के कंसोल बंद पड़े हैं। 2017 में सरकार ने 3000 वर्ग फीट तक की परमिशन जारी करने के अधिकार प्राइवेट आर्किटेक्ट को दिए हैं।

भोपाल की 70 फीसदी परमिशन आर्किटेक्ट ही दे रहे थे। लेकिन टीएंडसीपी ने उनके आॅफिस में बिना रजिस्ट्रेशन के नगर निगम द्वारा आर्किटेक्ट को दिए गए लाइसेंस पर आपत्ति कर दी है। अब यह फाइल नगर निगम और टीएंडसीपी के बीच झूल रही है।

क्यों खाली हुआ बिल्डिंग परमीशन

बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसे हालात क्यों बन गये कि नगर निगम का सर्वाधिक कमाई वाला विभाग बिल्डिंग परमीशन खाली हो गया। गौरतलब है कि इस मामले में हाल ही में यहां के एई लालजी चौहान को कैचमेंट एरिया में निर्माण की परमीशन देने के सिलसिले में संस्पेंड किया गया था। उसके बाद वहां पर नंदकिशोर डेहरिया और महेश सिरोलिया का तबादलाकर दिया गया। इससे पहले अनिल साहनी, संजय तिवारी और बीएस त्रिपा निलंबित किया गया था। अब उच्च न्यायालय से स्टे मीटिंग के बाद, निगम को उनका निलंबन समाप्त करना होगा और अत्याधिक प्रशासन द्वारा नियुक्त तिवारी और त्रियाल की कंपनी को भी निगम में बहाल करना होगा।

एबीपास-2 पड़ा है बंद

बिल्डिंग परमिशन का पोर्टल आॅटोमेटेड बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम (एबीपास-2) बंद पड़ा है। भोपाल जैसे बड़े शहरों में रोज 100-100 बिल्डिंग परमिशन के आवेदन होते हैं। प्रदेश में यह आंकड़ा 800-1000 है। यानी 3 दिन में करीब 3000 लोग आवेदन नहीं कर सकते हैं। कहा जा रहा है कि इंजीनियरों के तबादले के बादयहां का कामकाज पटरी पर आने में 8-10 दिन लग सकते हैं, क्योंकि लंबित आवेदनों का डेटा मैच करना पड़ेगा।