मुंबई फिर डूबी: जलवायु संकट ने उजागर की शहर की परेशानियां

मुंबई, देश की आर्थिक राजधानी, अगस्त 2025 में एक बार फिर मानसून की तबाही से जूझती दिखी। लगातार चार दिनों तक हुई 791 मिमी बारिश ने शहर की रफ़्तार थाम दी, जबकि अगस्त का औसत सिर्फ 560.8 मिमी है। जलवायु परिवर्तन और जटिल मौसमी तंत्र ने हालात और बिगाड़ दिए—सड़कें नदी बनीं, ट्रैफिक ठप हुआ और हज़ारों ज़िंदगियाँ अस्त-व्यस्त हो गईं। आँकड़े बताते हैं कि यह अगस्त पिछले पाँच सालों में सबसे बरसाती रहा है।

रेड अलर्ट और डूबती बस्तियाँ

20 अगस्त को भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई और आसपास के इलाक़ों के लिए रेड अलर्ट जारी किया।
विक्रोली में 21 घंटों में 194.5 मिमी बारिश वहीं मलाड के चिंचोली में एक दिन में 361 मिमी बारिश हुई।

इस बारिश ने पूरे शहर की नब्ज़ रोक दी। लोकल ट्रेनें बंद करनी पड़ीं, उड़ानें रद्द हुईं और सड़कों पर घंटों तक जाम लगा रहा। मीठी नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुँचने पर कुरला से 400 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया। दुख की बात है कि बारिश से जुड़े हादसों में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है।

क्लाइमेट चेंज बना बारिश का ‘स्टीरॉइड’

वैज्ञानिक मानते हैं कि अरब सागर और मध्य-पूर्व का बढ़ता तापमान हवा में ज़्यादा नमी भर रहा है, जिससे बारिश की तीव्रता कई गुना बढ़ रही है। जलवायु विशेषज्ञ डॉ. रघु मुर्तुगुड्डे के अनुसार—“क्लाइमेट चेंज बारिश को स्टीरॉइड की तरह ताक़तवर बना देता है। अब ऐसी चरम घटनाएँ नया सामान्य बन चुकी हैं।”

लेकिन सवाल है—क्या मुंबई तैयार थी? जवाब है, नहीं। शहर का ड्रेनेज सिस्टम सिर्फ 25 मिमी प्रति घंटा बारिश सहन करने लायक है, जबकि हकीकत इससे कहीं आगे निकल चुकी है।

बीएमसी पर सवाल और रास्ता आगे का

बीएमसी पर मीठी नदी की अधूरी सफ़ाई और धीमी कार्रवाई को लेकर आलोचना हो रही है। हालांकि, IIT बॉम्बे का मुंबई फ़्लड मॉनिटरिंग सिस्टम रियल-टाइम डेटा देकर नागरिकों की मदद करता दिखा।

विशेषज्ञ डॉ. सुबिमल घोष का सुझाव है कि अब वक्त आ गया है जब मुंबई को मज़बूत और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम ,फ़्लड मैपिंग और अर्ली वार्निंग ,ग्रीन इंफ़्रास्ट्रक्चर और टिकाऊ शहरी योजना पर काम किया जाए।

इस मानसून ने साबित कर दिया कि मुंबई सिर्फ बारिश से नहीं, बल्कि अपनी नाकाम तैयारियों से भी डूब रही है। अगर अब ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हर साल की बारिश माया नगरी की रफ़्तार रोकती रहेगी।