भोपाल | मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को ‘रीवाइल्डिंग’ की पहल की, जिसका उद्देश्य है—वन्यजीव पारिस्थितिकी को संतुलन करना, लुप्त और संकटग्रस्त प्रजातियों को पुनर्जीवित करना और जैव विविधता को बढ़ावा देना। यह पहल अन्य राज्यों के लिए वन संरक्षण का मॉडल बन सकती है।
“प्रकृति को उसकी मूल अवस्था में लौटाना ही लक्ष्य”— आधिकारिक विज्ञप्ति
सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मध्यप्रदेश वर्तमान में कई प्रजातियों जैसे कि स्वैम्प डियर (बारहसिंगा) के संरक्षण और पुनर्वास पर काम कर रहा है। वैज्ञानिक तरीकों की मदद से इन प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में लौटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
‘रीवाइल्डिंग’ का मूल भाव है—प्रकृति को उसकी शुद्ध, मूल अवस्था में लौटाना। इसके तहत उन शिकारियों और शिकार प्रजातियों को दोबारा जंगलों में बसाया जाएगा, जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक हैं लेकिन समय के साथ विलुप्त या दुर्लभ हो गए हैं। विज्ञप्ति में कहा गया कि इनके न होने से भोजन श्रृंखला टूट जाती है और प्राकृतिक जीवन चक्र मे समस्या आ जाती है जिससे पर्यावरण असंतुलित हो जाता है।
मध्यप्रदेश, जिसे ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है, समृद्ध जैव विविधता का धनी है। इसके बावजूद कई प्रजातियां विलुप्ति के खतरे में हैं। बारहसिंगा की संख्या लगातार घट रही है और बाघ-तेंदुओं का संतुलन भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में समय रहते प्रजातियों का पुनर्वास ही जंगलों के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में मददगार होगा।
‘रीवाइल्डिंग’ पहल के जरिए मध्यप्रदेश न केवल अपनी जैविक धरोहर को संरक्षित करने की कोशिश कर रहा है, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी वन्यजीव संरक्षण का एक नया मानक स्थापित कर सकता है।